पहाड़पानी (नैनीताल)। आलू की फसलों का पूरा बीमा नहीं मिलने से परेशान चल रहे पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को अब बारिश और बर्फबारी नहीं होने से परेशानी में डाल दिया है। जिले के ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी, रामगढ़ और भीमताल क्षेत्र में बारिश नहीं होने से 20 प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में सूख गई है। कृषि विभाग की ओर किए गए सर्वे में पर्वतीय क्षेत्रों के असिंचित भूमि पर गेहूं की खेती करने वाले लगभग 5500 किसानों को 20 प्रतिशत नुकसान पहुंचा है। साथ ही 30 जनवरी तक बारिश नहीं होने पर नुकसान शत प्रतिशत हो सकता है। साथ ही बर्फबारी नहीं होने से सेब के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। इधर जिले में अभी तक बारिश नहीं होने से पर्वतीय क्षेत्रों के किसान गेहूं, सरसों, जौ और सेब के उत्पादन को लेकर चिंतित है।
जिले में 19,229 हेक्टेयर में होता है गेहूं
जिले में गेहूं की खेती 19229 हेक्टेयर में की जाती है और उत्पादन 74128 मीट्रिक टन होता है। जिले में 24982 हेक्टेयर भूमि असिंचित है। असिंचित भूमि ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी रामगढ़, और भीमताल ब्लॉक में है। इन जगहों पर किसान बारिश और सिंचाई नहरों पर निर्भर रहते हैं लेकिन लंबे समय से बारिश नहीं होने से गेहूं की फसलों की सिंचाई नहीं होने से असिंचित भूमि में लगी गेहूं की फसल को 20 प्रतिशत नुकसान हो चुका है जबकि हल्द्वानी, रामनगर और कोटाबाग क्षेत्र की सिंचित भूमि में लगी गेहूं की फसल को फिलहाल अभी नुकसान नहीं पहुंचा है। बारिश नहीं होने से पर्वतीय क्षेत्रों में 20 प्रतिशत गेहूं की फसल प्रभावित हो चुकी है। सर्व रिपोर्ट निदेशालय को भेजी है। 30 जनवरी तक अगर बारिश नहीं हुई तो फसल और प्रभावित हो जाएगी। मैदानी क्षेत्रों में अभी चिंता की बात नहीं है। – रितु टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी, नैनीताल







