Friday, March 27, 2026
spot_img
Homeउत्तराखण्डकरोड़ों खर्च कर 21 एसटीपी बनाए पर घरों से नहीं जोड़े सिस्टम...

करोड़ों खर्च कर 21 एसटीपी बनाए पर घरों से नहीं जोड़े सिस्टम की खुली पोल कैसे स्वच्छ हो गंगा

गंगा की स्वच्छता के लिए सरकारों ने करोड़ों खर्च कर दिए। 21 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ऐसे बनाए, जिनसे आज तक घरों की सीवर लाइनें जोड़ी ही नहीं गईं। इसमें भू-धंसाव से जूझ रहा ज्योतिर्मठ भी शामिल है, जिसका एक कारण पानी का जमीन के अंदर जाना भी माना गया है।नमामि गंगे की ऑडिट रिपोर्ट में गंगा के तटवर्ती शहरों में सरकारों की इन योजनाओं की सुस्ती सामने आई है। ज्योतिर्मठ में 3.78 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी बनाए गए। यहां सरकार 42 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च कर चुकी है लेकिन आज तक केवल पांच नालों से आने वाले धूसर पानी का ही शोधन हो रहा है। सीवर लाइनें न बिछने के कारण कोई घर इनसे नहीं जुड़ पाया। इसी प्रकार नंदप्रयाग में 6.51 करोड़ रुपये की लागत से दो एसटीपी बने लेकिन केवल तीन नाले इनसे जुड़े, घरों का कोई कनेक्शन नहीं दिया गया।

कर्णप्रयाग में 12 करोड़ खर्च कर पांच एसटीपी बनाए गए। आज इनसे सात नालों को जोड़ा गया है लेकिन घरों का कोई कनेक्शन नहीं किया गया। रुद्रप्रयाग में करीब 13 करोड़ रुपये खर्च से छह एसटीपी बनाने के बाद केवल आठ नालों का धूसर पानी इनमें जा रहा है। किसी भी घर का कोई कनेक्शन नहीं जोड़ा गया। कीर्तिनगर में चार करोड़ की लागत से दो एसटीपी बनाए लेकिन कोई घरेलू सीवर कनेक्शन नहीं दिया। चमोली में पुराने सस्पेंशन ब्रिज के पास 64 करोड़ की लागत से एसटीपी बना लेकिर एक नाले से ही जोड़ा गया, किसी घर से श्रीनगर व श्रीकोट में तीन एसटीपी भी किसी घर से नहीं जोड़े गए।

बिना जनता की मांग बनाए 11 श्मशान घाट नदी तल में जल रहीं चिताएं
ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि नमामि गंगे के तहत जनता की मांग के बिना ही 11 श्मशान घाट बना दिए लेकिन लोग आज भी अंतिम संस्कार नदी के तल में ही कर रहे हैं। इनमें चमोली, नंद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, पोखरी पुल कर्णप्रयाग, घोलतीर रुद्रप्रयाग, कोटेश्वर टिहरी, गौचर, केदार उत्तरकाशी, हीना उत्तरकाशी, डुंडा उत्तरकाशी और उमरकोट कर्णप्रयाग श्मशान घाट शामिल है। इनमें से केवल केदार श्मशान घाट ही ऐसा पाया गया, जिसमें कुछ चिताएं जलाई गईं।

पीसीबी से अनुमति बिना हो रहा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
प्रदेश के 44 नगर निकाय पांच टन प्रतिदिन से अधिक मात्रा में ठोस अपशिष्ट एकत्रीकरण करते पाए गए लेकिन इनमें से नियमानुसार किसी भी नगर निकाय ने आज तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सर्टिफिकेट हासिल नहीं किया। कुछ ने आवेदन किया लेकिन पीसीबी के नियमों के हिसाब से नहीं पाए गए।

spot_img
spot_img
spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine
https://bharatnews-live.com/wp-content/uploads/2025/10/2-5.jpg





Most Popular

Recent Comments