Monday, February 16, 2026
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दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की मेडिकल बोर्ड नए सिरे से करेगा जांच फर्जी प्रमाण पत्र मामला

शिक्षा विभाग में दिव्यांगता के फर्जी प्रमाणपत्र से 51 शिक्षकों के नौकरी पाने के मामले की मेडिकल बोर्ड नए सिरे से जांच करेगा। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक पहले इन शिक्षकों से शपथ पत्र लिए जाएंगे। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बनाकर इनके प्रमाण पत्रों की जांच करवाई जाएगी। शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने के मामले में विभाग ने शिक्षकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में शिक्षकों को प्रमाण पत्रों के साथ निदेशालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के मुताबिक जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए वे निदेशालय में उपस्थित हो रहे हैं, जिनमें से कई शिक्षक खुद के दिव्यांगता प्रमाण पत्र को सही ठहरा रहे हैं।इन शिक्षकों का कहना है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इनके दिव्यांगता के प्रमाण पत्र बनाए हैं। शिक्षा निदेशक के मुताबिक अब बिना किसी मेडिकल जांच के इनके खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती। हालांकि वर्ष 2022 में राज्य मेडिकल बोर्ड ने इनमें से कुछ शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच की थी। जिसमें प्रमाण पत्रों को गलत बताया गया था।

यह है मामला
यह प्रकरण तब सामने आया जब नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। इस याचिका पर वर्ष 2022 में इन शिक्षकों के दिव्यांगता के प्रमाण पत्रों की राज्य मेडिकल बोर्ड से जांच कराई गई। वहीं, पिछले दिनों शासन ने भी प्रकरण की जांच के लिए एक समिति गठित की है। जो प्रकरण की जांच कर रही है। जल्द ही मेडिकल बोर्ड गठित कर इन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की इस बोर्ड से जांच करवाई जाएगी। जांच में जिन शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी मिलेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री

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