कलायत। अमृत सरोवर योजना के तहत चौशाला गांव में 2022 में शुरू हुए तालाबों के सौंदर्यीकरण का काम आज तक कछुआ चाल से ही चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना में घोटाला किया गया और निर्माण एजेंसी ने केवल दिखावा ही किया।भारतीय किसान यूनियन के नेता सुरेंद्र चौशाला, सन्नी चौशाला, दर्शन सिंह, अमित आदि ने बताया कि गांव के दो तालाबों में चारदीवारी, पगडंडी, पेड़-पौधे, शुद्ध जल और रोशनी जैसी सुविधाएं बनाई जानी थीं। लेकिन निर्माण एजेंसी ने केवल लीपापोती का काम किया। ग्रामीणों के विरोध और विभागीय शिकायतों के बाद एक तालाब पर कार्य दोबारा शुरू हुआ है, जबकि ढोबी घाट तालाब की स्थिति आज तक जर्जर बनी हुई है।
तालाबों में गंदा पानी जमा हो गया है, जो पशुओं के पीने के योग्य भी नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार ने न केवल सौंदर्यीकरण नहीं किया, बल्कि तालाब के घाटों की पुरानी ईंटें भी उखाड़ कर ले गया। नाराज ग्रामीणों का कहना है कि अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य गांवों में तालाबों का सौंदर्यीकरण, जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारना है, लेकिन चौशाला में इस परियोजना में भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने जिला प्रशासन से चार साल से अटकी परियोजना को जल्द पूरा करवाने की मांग की।इस मामले पर बीडीपीओ रितु ने कहा कि उनकी नियुक्ति हाल ही में हुई है और यह मामला 2022 का है। उन्होंने भरोसा दिया कि वे संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर जांच करेंगी और तालाबों का सुंदरीकरण पारदर्शिता के साथ पूरा करवाएंगी।







