Thursday, January 22, 2026
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उम्र पार कर चुकी हैं 25 बसें दौड़ाकर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़

पिथौरागढ़। परिवहन निगम पहाड़ की खतरनाक सड़कों पर पुरानी खटारा बसों को दौड़ाकर यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है। पिथौरागढ़ डिपो से भी उम्र पार कर चुकीं 25 बसों को सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। नई बसें न मिलने से डिपो के लिए इन बसों का संचालन करना मजबूरी बना है जो यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है। इस अनदेखी के चलते हर रोज दो हजार से अधिक यात्री इन पुरानी खटारा बसों में सफर करने के लिए मजबूर हैं।पिथौरागढ़ डिपो के बेड़े में 68 बस शामिल हैं। इनमें से 25 बसें ऐसी हैं जो पहाड़ की सड़कों पर दौड़ने के मानक पूरा कर चुकी हैं। इन बसों का पहाड़ की सड़कों पर सात लाख किलोमीटर संचालन हो चुका है। संवाद न्यूज एजेंसी ने वर्कशॉप पहुंचकर बसों की दयनीय हालत को लेकर पड़ताल की।

उम्र पार कर चुकीं पांच बसें खराबी आने से वर्कशॉप में खड़ी मिलीं जबकि अन्य बसों को तय रूटों पर भेजा गया। पुरानी बसों की बॉडी कई जगह क्षतिग्रस्त मिलीं तो टायर पूरी तरह घिस गए हैं।इन बूढ़ी बसों की खराबी को दूर करने में मैकेनिक जुटे हैं ताकि फिर से इन्हें सड़कों पर हांफते हुए दौड़ाया जा सके। हैरानी है कि मानकों और यात्रियों की सुरक्षा को दरकिनार कर इन बसों का संचालन किया जा रहा है जो आए दिन रास्तों पर धोखा दे रही हैं। आए दिन इनमें खराबी आ रही है और ये रास्तों पर खड़ी हो रही हैं। बीते सोमवार को लोहाघाट में पुरानी बस का ब्रेक फेल होने की घटना सामने आई है। ऐसे में साफ है कि पिथौरागढ़ में यदि बूढ़ी बसों का संचालन ऐसे ही होता रहा तो ये भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

डिपो के पास सिर्फ 23 बसें नई
पिथौरागढ़ डिपो के पास सिर्फ 23 बसें नई हैं। अन्य सभी बसें पुरानी हो चुकी हैं जो धीरे-धीरे डिपो के साथ ही यात्रियों का साथ छोड़ रही हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि खराबी आने से पांच बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। नई बस न मिलने से डिपो पुरानी, खटारा हो चुकीं बसों की खराबी को दूर कर इन्हें सड़कों पर दौड़ा रहा है।

बसों के लिए टायर भी नहीं मिल रहे
पिथौरागढ़ डिपो से बसों का जुगाड़ से संचालन हो रहा है। बसों के लिए पर्याप्त टायर और स्पेयर पार्ट्स भी नहीं मिल रहे हैं। बमुश्किल डिपो टायरों पर रबर चढ़ाकर इनका संचालन कर रहा है। वहीं पर्याप्त स्पेयर पार्ट्स न मिलने से किसी तरह जुगाड़ कर बसों को दौड़ाना डिपो की मजबूरी है।

कोट
समय-समय पर बसों की फिटनेस की जाती है। जांच के बाद ही बसों का संचालन किया जाता है। पिछले दिनों दो नई बसें मिली हैं। उम्मीद है जल्द अन्य बसें भी मिलेंगी। – रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़ डिपो

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