शिक्षा विभाग के कारनामे भी अजीबोगरीब हैं। विभाग की ओर से अधिकतर राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर उपलब्ध करा दिए गए हैं लेकिन शत प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। 275 स्कूलों में बिजली और 191 में बच्चों के पीने के लिए पानी तक नहीं है। प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों के बच्चे फर्नीचर न होने से सर्द मौसम में जहां जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। पेयजल उपलब्ध न होने से पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। यह हाल तब है जबकि विभाग की ओर से इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को हाईटेक सुविधा के दावे किए जा रहे हैं।
विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अल्मोड़ा जिले के 58, बागेश्वर के 14, चमोली के नौ, देहरादून के छह, नैनीताल के 54, पौड़ी जिले के 66, पिथौरागढ़ के 43, टिहरी गढ़वाल के 17 और उत्तरकाशी जिले के आठ स्कूलों में बिजली नहीं है। जबकि अल्मोड़ा के 15, चंपावत के 13, देहरादून के सात, नैनीताल के 43, पौड़ी के 15, पिथौरागढ़ के 89, रुद्रप्रयाग के दो, टिहरी का एक और उत्तरकाशी जिले के छह स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।
देहरादून के 4, टिहरी के 3 स्कूलों में शौचालय नहीं
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून जिले के चार, टिहरी जिले के तीन और पिथौरागढ़ के एक स्कूल में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। सूत्रों के मुताबिक जिन स्कूलों में शौचालय हैं, उनकी भी सफाई की कोई खास व्यवस्था नहीं है।
12698 स्कूलों में हैं कंप्यूटर
प्रदेश के राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक 12698 विद्यालयों में कंप्यूटर हैं, सभी स्कूलों में जरूरी संसाधनों के बिना कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाने से इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ शिक्षकों का आरोप है कंप्यूटर के नाम पर खेल हुआ है। प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।स्कूल में कंप्यूटर से बच्चों को उसकी बेसिक जानकारी दी जाती है लेकिन कंप्यूटर से पहले शत प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी है। कुछ स्कूलों में बिजली नहीं है, तो कुछ स्कूल भवन जर्जर बने हैं। – विनोद थापा, प्रदेश अध्यक्ष जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ







