उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायालय ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि वह अभ्यर्थी के मूल दस्तावेजों का पुन: सत्यापन करे, जिसे काउंसलिंग के समय ओरिजिनल सर्टिफिकेट उपलब्ध न होने के कारण प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तरकाशी जिले की असिस्टेंट टीचर, प्राथमिक विद्यालय, की भर्ती से जुड़े मामले में याची ने कहा था कि अभ्यर्थी का नाम मेरिट लिस्ट में 79.17 अंकों के साथ 392वें स्थान पर था, जबकि अंतिम चयनित अभ्यर्थी के अंक केवल 73.50 थे। 12 जनवरी 2026 को हुई काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थी के पास डीएलएड की केवल डाउनलोड की गई मार्कशीट थी, क्योंकि मूल प्रमाणपत्र बोर्ड ने 14 जनवरी को ही जारी किए।
मूल दस्तावेज न होने के कारण विभाग ने अभ्यर्थी की उम्मीदवारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अभ्यर्थी के मेरिट में होने को देखते हुए उसे एक और अवसर देने का आदेश दिया।कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को 30 जनवरी को प्रातः 11 बजे जिला शिक्षा अधिकारी, उत्तरकाशी, के समक्ष अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना होगा। यदि दस्तावेज सही पाए जाते हैं और अभ्यर्थी पात्र है, तो उसे मेरिट और भर्ती नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिस्थितियों के कारण हुए विलंब की वजह से किसी योग्य अभ्यर्थी को अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।







