देहरादून। उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में शुक्रवार की शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और उत्तराखंडी गीतों के नाम रही। दिन में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति से समां बांधा। शाम को लोकगायकों ने उत्तराखंडी गीतों पर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। महोत्सव में लगे स्टॉल से लोगों ने खूब खरीदारी की।परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने किया। उन्होंने कहा कि महोत्सव में संस्कृति, सभ्यता, परंपरा, रोजगार, आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम दिखा है। भारत उत्सवों का देश है। हम हर पल और हर क्षण जीवन को ढोते नहीं बल्कि जीते हैं। मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने कहा कि हमारी विरासत, संस्कृति को बचाकर ही नहीं रखना बल्कि आगे बढ़ाना भी है। आज की तकनीकी दुनिया में अपनी संस्कृति, विरासत को बचाने की ये पहल सराहनीय है।
मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी ने कहा कि कौथिक में कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, गोरखाली और पंजाबी समाज की संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है। हम सबकी जिम्मेदारी है कि हमारी समृद्ध संस्कृति को जीवंत रखा जाए और कर्तव्य है कि आने वाली पीढ़ी भी हमारी संस्कृति से जुड़ी रहे।उन्होंने कहा कि जब तक संस्कृति है, हमारी विरासत है, तब तक हमारी एक अलग पहचान है। पेड़ तब तक हरे-भरे रहते हैं जब तक वह अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। हमारे लोकगीतों में भी हमारी संस्कृति का बखान होता है। वहीं, 172 स्टॉल लगाए गए हैं जिनमें से 100 स्टॉल हमारे हर जिले से आए हैं।
गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों ने किया मंत्रमुग्ध
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव की शाम की संध्या में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने प्रस्तुति दी। जैसे ही उनकी प्रस्तुति शुरू हुई तो महोत्सव में शामिल हर व्यक्ति झूमने लगा। गढ़वाली गीतों की मनमोहक प्रस्तुति पर हर कोई थिरक रहा था। वहीं, पद्मश्री बसंती बिष्ट ने भी महोत्सव में प्रस्तुति देकर समां बांधा।







