Thursday, February 12, 2026
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वैज्ञानिकों ने बताई बड़ी उपलब्धि सातताल झील में महाशीर की नई प्रजाति टोर साततालेंसिज की खोज

नैनीताल जिले के भीमताल में केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीआईसीएफआर) भीमताल के वैज्ञानिकों ने सातताल झील से एक नई महाशीर प्रजाति की टोर साततालेंसिज मछली की खोज की है। ठंडे पानी में वास करने वाली मछलियों के अनुसंधान के लिहाज से वैज्ञानिक इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। वैज्ञानिकों ने टोर साततालेंसिज पर अब विस्तृत रिसर्च शुरू कर दी है। उनकी इस खोज और अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल बायॉलोजी में पब्लिकेशन के लिए मंजूरी मिल गई है।

शीतजल मत्स्य जैव विविधता के वर्गीय ज्ञान को बढ़ाएगी स्पेसीज
वैज्ञानिकों की ओर से की गई यह खोज हिमालयी शीतजल मत्स्य जैव विविधता के वर्गीय ज्ञान को बढ़ाएगी। खोज साइप्रिनिड मछलियों के उतकीय क्रमिक विकास और जैव भौगोलिक वितरण के बारे में भी जानकारी देगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह खोज मीठे जल के परिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को बढ़ावा देगी।

अन्य मछलियों से अलग है टोर साततालेंसिज
सातताल झील से मिली टोर साततालेंसिज की महाशीर प्रजाति की पहचान एक समेकित वर्गीय (इंटीग्रेटिव टैक्सोनॉमिक) तरीके से की गई है। इसमें विस्तृत आकृतिक एवं मेरिस्टिक (पंखों की किरणें, रीढ़, शल्क के लक्षण) प्रजातियों की पहचान, विश्लेषण, अस्थि विज्ञान परीक्षण और माइटोकॉन्ड्रियल जीन और एटीपेस 6-8 (अमीनो एसिड से बना एक हाइड्रोफोबिक, हाइड्रोफिलिक पॉलीपेप्टाइड है जो आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली में अंतर्निहित होता है) का उपयोग करते हुए आणविक विश्लेषण शामिल है। वैज्ञानिकों के अध्ययन के मुताबिक टोर साततालेंसिज अन्य सभी ज्ञात समजातीय प्रजातियों से अलग है। इसके निचले जबड़े के संधि स्थल (मैडिबुलर सिंफिसिज) के नीचे मांसल मध्य लोब नहीं है। साथ ही निचला ओष्ठ यू आकार और आंशिक रूप से ग्रे कलर का है। इसके ओष्ठ हाइपरट्रॉफिक नहीं हैं। यह प्रजाति वर्तमान में केवल अपने प्रवास स्थल सातताल में ही मिली है इसीलिए वैज्ञानिकों ने इसे साततालेंसिज नाम दिया है।हिमालय के नाजुक जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों के सतत प्रबंधन के संरक्षण पर आधारित विज्ञान को प्रोत्साहित करने के प्रति आईसीएआर निरंतर प्रयास कर रहा है। सातताल झील से टोर साततालेंसिज की खोज ताजे पानी की जैव विविधता को दर्शाती हैं। यह बहुत अच्छी प्रजाति है जो अभी तक खोजी नहीं गई थी। इस खोज से वर्गीय अनुसंधान आगे बढ़ाने के साथ ही शीतजल मत्स्य विविधता की समझ को बढ़ाने में कारगर मदद मिलेगी।- डॉ. अमित पांडे, निदेशक सीआईसीएफआर, भीमताल

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