रुद्रपुर में एसएसपी मणिकांत मिश्रा को आखिरकार ऊधमसिंह नगर जिले से जाना पड़ा। काशीपुर के किसान सुखवंत आत्महत्या मामला विवादों के ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ।छह सितंबर 2024 को मणिकांत को जिले का एसएसपी बनाया गया था। ऊधम सिंह नगर में एक साल, पांच महीने और सात दिन का उनका कार्यकाल विवादों से भरा रहा। खुद के लिए सिंघम की छवि गढ़ने वाले आईपीएस मणिकांत की अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रहने पर उत्तराखंड ही नहीं उत्तर प्रदेश में तक जमकर किरकिरी हुई थी। सत्ता पक्ष के विधायक उनके खिलाफ रहे।काशीपुर के किसान सुखवंत आत्महत्या मामले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। सुखवंत मामले की एसआईटी टीम में शामिल आईपीएस अजय गणपति को ही अब यहां की कमान मिल गई है। अजय इससे पहले चंपावत के एसपी थे।
इन तरह रहा विवादों से नाता
पहला विवाद
11 मार्च 2025 को एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने करीब 300 पुलिस कर्मियों के साथ बरेली के थाना फतेहगंज पश्चिमी के अगरास समेत कई जगहों पर दबिश दी। 70 गाड़ियों से पुलिस बरेली पहुंची थी और 16 संदिग्धों को पकड़कर अपने साथ रुद्रपुर ले आई। जहां पूछताछ के बाद अगरास के आसिफ हुसैन को गिरफ्तार कर जेल भेजा बाकी 15 को छोड़ दिया। इस कार्रवाई के बाद बरेली एसएसपी अनुराग आर्य ने कड़ी नाराजगी जताई। कहा था कि यूएस नगर पुलिस ने उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। इसकी शिकायत अनुराग ने मुख्यमंत्री और डीजीपी से तक की और कहा था कि त्योहारों के समय यह कार्रवाई जनाक्रोश भड़क सकता था। जिन्हें हिरासत में लिया गया उन 16 लोगों में से केवल एक के खिलाफ मारपीट का केस था, बाकी सभी निर्दोष पाए गए थे।
दूसरा विवाद
29 फरवरी 2025 को अराजक तत्वों ने दलपुरा के डलबाबा मंदिर के पास बुक्सा समाज के आराध्य राजा जगत देव की प्रतिमा खंडित कर दी थी। तब से आज तक पुलिस अराजक तत्वों को नहीं पकड़ सकी। इस मामले में इसी साल जनवरी में विधायक अरविंद पांडेय एसएसपी मणिकांत मिश्रा से मिलने उनके कार्यालय में पहुंचे। विधायक को मुलाकात का समय देकर एसएसपी खुद कहीं चले गए थे। जिस पर विधायक भड़के और यहां तक कह दिया तुम हमें ज्यादा दिन घुमा नहीं पाओंगे। काम करना है कि सही ढंग से करें। उनकी सरकार को भ्रष्ट अधिकारियों की जरूरत नहीं है।
तीसरा विवाद
10 जनवरी की रात काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह ने गौलापार स्थित देवभूमि होटल में तमंचे से कनपटी पर गोली मारकर जान दे दी थी। मरने से पहले उसने अधिकारियों को ईमेल किया। वीडियो व लिखित में सुसाइड नोट जारी किया था। जिसमें एसएसपी मणिकांत मिश्रा, आईटीआई थाना प्रभारी कुंदन रौतेला समेत कई पुलिस कर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। यहां तक कहा मेरे मरने पर शव के टुकड़े कर बेच दिए जाएं और उससे जो पैसे आए उन्हें पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों में बांट दिया जाए। इस मामले में एसएसपी समेत अन्य पर लगे आरोपों की जांच एसटीएफ के आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे की अगुवाई वाली टीम कर रही है।
चौथा विवाद
एसएसपी मणिकांत मिश्रा के खिलाफ पहली बार पूरा विपक्ष एकजुट हो गया था। सुखवंत प्रकरण में एसएसपी को हटाने के लिए कांग्रेस के बड़े नेताओं ने देहरादून में डीजीपी कार्यालय में धरना दिया था। एसएसपी पर कांग्रेसियों ने भ्रष्टाचार के आरोप व किसान सुखवंत की आत्महत्या का जिम्मेदार माना था।
यहां भी हुए फेल
37 अपराधियों को लंगड़ा करने का दंभ भरने वाले मणिकांत मिश्रा अग्रसेन चौक में मोबाइल मंत्रा की दुकान में हुई चोरी का खुलासा करने में विफल हुए। चार फरवरी को बेखौफ चोरों ने पूरी रात दुकान खंगाली और 12 लाख के मोबाइल ले गए। चोर आज तक नहीं पकड़े जा सके।







