सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा मेरठ में देश के पहले मानव रहित विमान व ड्रोन रनवे का निर्माण किया जाएगा। बीआरओ ने इसके लिए 406 करोड़ रुपये की परियोजना का टेंडर जारी कर दिया है। किला रोड पर 900 एकड़ में बनने वाला यह रनवे रक्षा, निगरानी, ड्रोन परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा।ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को नया रूप देना शुरू कर दिया है। सरकार ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मेरठ छावनी में देश का पहला समर्पित मानव रहित विमान (यूएवी) और ड्रोन रनवे विकसित करने की तैयारी कर ली है। दिल्ली के निकट होने के कारण मेरठ में इस परियोजना के निर्माण को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश की हवाई चौकसी को नई मजबूती मिलेगी।
परियोजना का जिम्मा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को सौपा गया है। बीआरओ के मुख्य अभियंता द्वारा इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। टेंडर के अनुसार, इस परियोजना पर 406 करोड़ रुपये का खर्च होगा। इसके लिए किला रोड पर लगभग 900 एकड़ जमीन का चयन किया गया है। इस परियोजना को पूरा होने में लगभग सात वर्ष लगने का अनुमान है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक विश्व में युद्ध के तौर-तरीके पूरी तरह से बदल गए हैं, इसलिए भविष्य के युद्धों के लिए इस प्रकार के रनवे की जरूरत पड़ेगी। विशेष तौर पर ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के लिए इस रनवे का डिज़ाइन तैयार किया गया है। इस पर ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा।
आपदा के समय भी मिलेगा फायदा
मेरठ में बनने वाले ड्रोन रनवे का प्रयोग कई प्रकार से किया जा सकेगा। सैन्य जरूरतों, आपदा प्रबंधन, सैन्य निगरानी, प्राकृतिक आपदा के समय राहत व बचाव कार्यों और दूरदराज आवश्यक सामग्री पहुंचाने में इसका उपयोग हो सकेगा। सीमा सड़क संगठन के अनुसार, इस रनवे की लंबाई 2110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। सी-295 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों के साथ रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट का संचालन यहां से हो सकेगा। यह परियोजना भारतीय सेना के लिए एक स्ट्रेटेजिक हब के तौर पर काम करेगी।







