Sunday, April 5, 2026
spot_img
Homeउत्तराखण्डसुपर वीकेंड पर प्रशासनिक दावे हुए बेदम

सुपर वीकेंड पर प्रशासनिक दावे हुए बेदम

धार्मिक और पर्यटन नगरी ऋषिकेश में हालात ऐसे बन गए हैं कि जाम अब अस्थायी परेशानी नहीं, बल्कि शहर की नियति बन चुका है। तीन दिन के सुपर वीकेंड ने प्रशासन के तमाम दावों की हवा निकाल दी और यह साफ कर दिया कि चारधाम यात्रा के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन के लिए बनाई गई योजनाएं केवल बैठकों तक ही सीमित हैं।शहर की सड़कों की क्षमता जहां करीब 20 हजार वाहनों की है, वहीं हकीकत में रोजाना एक लाख से अधिक वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं। नतीजा, हाईवे से लेकर अंदरूनी गलियों तक हर जगह जाम ही जाम। हालात तब और बिगड़ गए जब हाईवे पर जाम से बचने के लिए गूगल मैप ने वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों के तौर पर संकरी गलियों में भेजना शुरू किया, जिससे गलियां भी पूरी तरह पैक हो गईं।ऋषिकेश की सड़कों पर पसरा यह जाम न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि योजनाओं और हकीकत के बीच की खाई कितनी गहरी हो चुकी है। प्रशासन की ओर से रूट प्लान और डायवर्जन की रणनीतियां जरूर बनाई जाती हैं, लेकिन उनका धरातल पर असर नजर नहीं आता।सुपर वीकेंड के दौरान जो हालात बने, उन्होंने साफ कर दिया कि चारधाम यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के लिए अभी भी ठोस और जमीनी तैयारी की भारी कमी है।

फुटपाथ पर दुकानें, राहगीर सड़कों पर
शहर के फुटपाथों पर अतिक्रमण ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। दुकानों से घिरे फुटपाथों के कारण पैदल चलने वाले लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जिससे ट्रैफिक का दबाव और बढ़ रहा है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों को रोजाना घंटों जाम में फंसकर जूझना पड़ रहा है। वहीं चौराहों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई प्रमुख स्थानों पर न तो पर्याप्त पुलिस बल तैनात है, न ही ट्रैफिक लाइट और जेब्रा क्रॉसिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में यातायात पूरी तरह अव्यवस्थित होकर रह गया है।

चार सिपाहियों के भरोसे लाखों वाहनों का ट्रैफिक
यातायात पुलिस के पास केवल चार सिपाही हैं, जिनकी मदद के लिए 24 होमगार्ड तैनात किए गए हैं। इसके अलावा एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर (टीआई) और एक ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर (टीएसआई) पूरे शहर की व्यवस्था संभाल रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के 10 से अधिक व्यस्ततम चौराहों पर इन्हीं सीमित संसाधनों के साथ ट्रैफिक नियंत्रित करना पड़ रहा है। बढ़ते वाहनों का दबाव, अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के बीच यह व्यवस्था पटरी से उतर रह है।

spot_img
spot_img
spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine
https://bharatnews-live.com/wp-content/uploads/2025/10/2-5.jpg





Most Popular

Recent Comments