लिवर रोगों के इलाज में ट्राइगोनेला (मेथी) से नई उम्मीद जगी है। इलाज का तरीका खोजने में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वैज्ञानिकों को कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने चूहों पर परीक्षण किया। इसमें देखा गया कि ट्राइगोनेला ने न केवल लिवर की सूजन और फाइब्रोसिस को कम किया, बल्कि रेगुकैल्सिन के जरिये कैल्शियम संतुलन और कोशिकीय स्वास्थ्य को भी सुधारा। यह खोज लिवर खतरों के खिलाफ सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह रक्त को साफ करता है। विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को हटाता है। भोजन पचाने में मदद करने के लिए पित्त बनाता है।
ऊर्जा (शर्करा, वसा) जमा करता है। जब लिवर को चोट लगती है तो शरीर उसे ठीक करने के लिए फाइब्रोसिस (स्कार उत्तक) बनाता है, लेकिन लंबे समय तक चोट बनी रहने पर यही फाइब्रोसिस गंभीर रूप ले लेती है, जो आगे चलकर सिरोसिस और लिवर कैंसर तक पहुंच सकती है।प्रोफेसर रियाज़ अहमद और शोधार्थी दानिशशोधार्थी मोहम्मद दानिश ने बताया कि नाइट्रोसामाइंस नामक रसायन लिवर के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। यह रसायन प्रोसेस्ड मीट, बेकन, बीयर, पनीर, दूध पाउडर और कुछ दवाओं में भी पाए गए हैं। इनमें एनडीएईए और एनडीएमए जैसे तत्व लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। ये रसायन लिवर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा करते हैं, डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं और फाइब्रोसिस को बढ़ावा देते हैं। दानिश का यह शोध खोज अंतरराष्ट्रीय जर्नल में छप चुका है।
चूहों पर हुआ परीक्षण
यूनिवर्सिटी के जंतु विभाग के प्रो. रियाज अहमद ने बताया कि पहले 15 चूहों के लिवर के सूजन को बढ़ाया गया और फाइब्रोसिस को कम किया गया। प्लास्टिक के पिंजरे में चूहों को 21 दिन तक ट्राइगोनेला का 10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम के हिसाब से खुराक दी गई। इसके बाद पाया कि चूहे के लिवर के एन्जाइम सामान्य होने लगे। रेशेदार प्रोटीन का जमाव कम हुआ। सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव घट गया। लिवर के कार्य करने में सुधार भी दिखा। इसके बाद ढाई साल तक चूहों पर किए परीक्षण बनी रिपोर्ट पर ढाई साल तक अध्ययन हुआ। अध्ययन में मिला कि लिवर के इलाज में ट्राइगोनेला की भूमिका महत्वपूर्ण है।







