नगर निगम प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बस अड्डा फेस-दो को तीन साल पुराने अतिक्रमण से मुक्त करा लिया है। विरोध और व्यापारियों की आपसी बहस के बीच पुलिस की सुरक्षा में अवैध ढांचों को हटाया गया, जिससे बस अड्डा परिसर एक बार फिर खुला-खुला नजर आने लगा है। नगर निगम की ओर से बस अड्डे में आवंटित दुकानों के आगे कुछ दुकानदारों ने जाली से कवर इन दुकानों के बराबर दुकानें बना दी थी। तीन साल पहले कुछ व्यापारियों ने नगर निगम प्रशासन से शेड के नीचे जाली से कवर कर बनाए स्टोरों को ध्वस्त करने की मांग की थी। नगर निगम प्रशासन ने अतिक्रमण करने वाले व्यापारियों को नोटिस देने के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था। उसके बाद कुछ व्यापारियों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी।
शनिवार को सुबह 11 बजे नगर निगम की टीम बिना पुलिस बल के जेसीबी और ट्रैक्टर लेकर प्रभारी कर अधीक्षक भारती के नेतृत्व में अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची। जैसे ही टीम ने अतिक्रमण हटाना शुरू किया, ट्रांसपोर्टरों के दो पक्ष आपने-सामने आ गए। एक पक्ष शेड को पूरी तरह से ध्वस्त करने और दूसरा पक्ष केवल जाली हटाने के पक्ष में था। मामला बिगड़ता देख नगर निगम प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस बल के आने के बाद नगर निगम ने अतिक्रमण हटाना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों ने स्वयं अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया।
आईएसबीटी से चंद्रभागा पुल के मध्य नहीं हटा अतिक्रमण
आईएसबीटी से चंद्रभागा पुल के मध्य अतिक्रमण नहीं हटा। इस रोड पर हुए अतिक्रमण को लेकर स्थानीय निवासी सुनील मेहता ने जिलाधिकारी की जनसुनवाई कार्यक्रम में शिकायत की थी। डीएम ने नगर आयुक्त को इस रोड पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। नगर आयुक्त ने शिकायतकर्ता से वार्ता की थी।
क्या था मामला
करीब तीन साल पहले ट्रांसपोर्टर भोला दत्त जोशी, विजय कुमार राजभर और तीन अन्य व्यापारियों ने बस अड्डा फेस-दो में नगर निगम की ओर से आवंटित दुकानों के आगे बने शेड के नीचे हुए अतिक्रमण हटाने के लिए शिकायत की थी। तब निगम ने अतिक्रमण करने वाले व्यापारियों को नोटिस देकर इतिश्री कर दी थी। कार्रवाई न होते देख भोला दत्त जोशी ने इस मामले में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी।
कोट
आईएसबीटी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का मुद्दा डीएम जन सुनवाई कार्यक्रम में पहुंचा था। उस क्रम में बस अड्डा में किए अतिक्रमण को जेसीबी की मदद से ध्वस्त किया गया। – गोपालराम बिनवाल, नगर आयुक्त ऋषिकेश







