Tuesday, February 10, 2026
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भारत के खिलाफ कराया क्रैश कोर्स आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तान के तीन विश्वविद्यालयों में रची साजिश

भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने के साथ दुनिया भर में कैसे माहौल खराब किया जाए इसके लिए बाकायदा पाकिस्तान के भीतर पिछले सप्ताह 36 घंटे का आतंक का एक क्रैश कोर्स कराया गया। यह क्रैश कोर्स पाकिस्तान की तीन प्रमुख यूनिवर्सिटी के भीतर आयोजित हुआ।इसमें इस्लामाबाद स्थित द इंस्टिट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज, सिंध एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और फैसलाबाद की यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चर एंड सोशल स्टडीज शामिल थी। इन सभी सेंटर्स में पाकिस्तान ने सेना अधिकारियों से लेकर आईएसआई और लश्कर-ए-ताइबा से लेकर जैश-ए- मोहम्मद के आतंकियों को शामिल किया था।भारत के खिलाफ तैयार किए गए 36 घंटे के क्रैश कोर्स के बाद बुधवार और बृहस्पतिवार को कश्मीर घाटी से लेकर भारत के अलग-अलग हिस्सों में अपनी स्लीपर सेल के माध्यम से माहौल खराब करने की पूरी योजना बनाई थी। बुधवार की सभी नापाक कोशिशें नाकाम कर दी गई हैं जबकि बृहस्पतिवार की सभी साजिशों की जानकारी खुफिया एजेंसी से लेकर सुरक्षा बलों के पास पहुंच चुकी है।

आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तान की तीन यूनिवर्सिटी में रची साजिश
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और उसकी सरकार ने भारत के खिलाफ 4 फरवरी यानी बुधवार को दिन में 11 बजे नीलम वैली समेत लाहौर, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, पेशावर और कराची में एक रैली का भी आयोजन किया था। हालांकि भारत के खिलाफ यह रैली पूरी तरह से फ्लॉप रही। दरअसल इसके पीछे बहुत बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि पाकिस्तान अपने देश में ही गृह युद्ध जैसी स्थिति से जूझ रहा है। दरअसल यह युद्ध उसके अपने ही देश के बलोच लड़ाकों की वजह से बना हुआ है।

आतंक का कोर्स
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक क्रैश कोर्स में सीमा पर बसे मदरसों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को प्रशिक्षण दिया कि कैसे हमें हथियारबंद लोगों को पनाह देनी है। इसके अलावा कश्मीर घाटी में स्लीपर सेल के लोगों को पनाह देने के लिए घरों के दरवाजे हमेशा खोले रखने के लिए कहा गया। सूत्रों के मुताबिक मदरसों और अन्य स्कूलों के बच्चों को पेंटिग्स से लेकर गायन प्रतियोगिता और निबन्ध लेखन प्रतियोगिता कराके भारत के खिलाफ जहर बोने को कहा गया। इसके अलावा टेरर मॉड्यूल का प्रशिक्षण लेने वालों को बताया गया कि उनको आतंकी संगठनों की कार्यप्रणाली को समझने के लिए बॉर्डर इलाकों में जाना चाहिए।

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