कुमाऊं से अयोध्या और काशी के लिए एक भी ट्रेन नहीं है। हल्द्वानी और काठगोदाम में पूर्वांचल के कई जनपदों के साथ ही बिहार तक के मजदूर रहते हैं। ट्रेन सेवा न होने से सबको कठिनाई होती है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर है और इसे देखने की चाह में कुमाऊं के हजारों लोगों को है। सीधी ट्रेन सेवा न होने और सड़क मार्ग अधिक खर्चीला होने के कारण कई लोग रामलला के दर्शन करने नहीं जा पाए हैं। वर्तमान समय में काठगोदाम से जयपुर होकर जैसलमेर, काठगोदाम से लखनऊ, गोरखपुर होकर हावड़ा, काठगोदाम से बरेली होकर लखनऊ तथा देहरादून और दिल्ली तक की ट्रेनें तो हैं लेकिन अयोध्या के लिए भी एक भी गाड़ी नहीं है। जिस प्रकार गढ़वाल से अयोध्या तक की ट्रेन है उसी प्रकार कुमाऊं से भी अयोध्या और काशी के लिए ट्रेन सेवा की मांग ने जोर पकड़ा है। यहां से नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर के ज्यादातर लोग काठगोदाम से आकर ट्रेन पकड़ते हैं।
ऐसे चला सकते हैं अयोध्या-काशी की ट्रेन
काठगोदाम से लालकुआं, रुद्रपुर, रामपुर, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, शाहगंज, जौनपुर होकर वाराणसी के लिए ट्रेन चलाई जा सकती है। इसी ट्रेन को गाजीपुर, बलिया होते हुए छपरा, मुजफ्फरपुर तक चलाया जाए तो इसका सीधा लाभ पूर्वांचल के 15 से ज्यादा जिलों के साथ ही बिहार के आधा दर्जन जनपदों को पहुंचेगा।श्रीराम मंदिर बना तो कुमाऊं के लोग सबसे ज्यादा खुश हुए। यहां से अयोध्या अपने साधन से ही जाया जा सकता है। यदि काठगोदाम से सीधी ट्रेन चले तो ज्यादा सुविधा होगी। – सोनी सबरवाल, व्यापारी
रेल मंत्रालय को इस दिशा में विचार करने की जरूरत है। अयोध्या और काशी को जोड़ते हुए काठगोदाम से ट्रेन सेवा समय की जरूरत है। – दीपक माहेश्वरी, व्यापारी
श्रीराम मंदिर को देखने की इच्छा तो हैं लेकिन लंबी दूरी होने तथा ट्रेन न होने से मन में इच्छा दबी रह जाती है। इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। – वीरेंद्र गुप्ता, प्रदेश प्रभारी
काठगोदाम और हल्द्वानी के साथ ही आसपास के स्थानों में पूर्वांचल के हजारों लोग रहते हैं। यदि ट्रेन सेवा शुरू होगी तो इसके यात्री भी आसानी से मिल सकते हैं। – अजय राठौर, व्यापारी
श्रीराम का मंदिर तो आदमी बार-बार देखे तो भी मन नहीं भरेगा। श्रीराम सबके आराध्य हैं। कुमाऊं से भी अयोध्या के लिए सीधी ट्रेन का संचालन होना चाहिए। – धर्मेंद्र
काठगोदाम, हल्द्वानी से लखनऊ होकर अयोध्या और काशी तक के लिए वंदे भारत जैसी ट्रेन का संचालन किया जाए। ताकी यात्रा सुगम और आनंददायक रहे। – नितेश थुवाल, व्यापारी







