रुद्रपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के बैनर तले शहर के सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने हड़ताल कर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग की। इस दौरान बैंकों पर पूरे दिन ताले लटके रहे।मंगलवार को बैंक कर्मी सिविल लाइन स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। उनका कहना था कि मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था में काम का बोझ बढ़ चुका है। लंबे समय तक कार्यालय में रहने के कारण वे अपने परिवार और बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। पारिवारिक माहौल बनाए रखने और मानसिक तनाव कम करने के लिए पांच दिवसीय बैंकिंग बेहद जरूरी हो गई है। इस दौरान शहर के लगभग सभी सरकारी व निजी बैंक बंद रहे। संगठन के पूर्व महासचिव गिरीश जोशी ने कहा कि बैंकिंग कार्य अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है। विशेष रूप से महिला कर्मचारियों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें कार्यालय के साथ-साथ घर और बच्चों की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।संगठन के पूर्व अध्यक्ष समीर राय ने कहा कि कर्मचारी और अधिकारी सुबह 10 बजे कार्यालय पहुंचते हैं और कई बार रात आठ से नौ बजे तक काम पूरा करने में लगे रहते हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में विकास, आरके छाबड़ा, तुलाराम, फकीर सिंह बिष्ट, कैलाश सिंह, सुनील भट्ट, साहिल, रविना, देवेंद्र, राहुल सहित अनेक बैंक कर्मी मौजूद रहे।
पांच दिवसीय सप्ताह की मांग और कर्मचारी विरोधी नीतियों का कर रहे विरोध
काशीपुर। पांच दिवसीय सप्ताह की मांग, कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ मंगलवार को बैंक कर्मी राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। इससे काशीपुर में करीब दो हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।उत्तरांचल बैंक एंप्लाइज यूनियन के बैनर तले मंगलवार सुबह 11 बजे सभी बैंक कर्मी बैंकों को बंद करके बाजपुर रोड स्थित केनरा बैंक की मुख्य शाखा पर एकत्र हुए। यहां पर बैंक कर्मियों की सभा हुई, जिसमें सहायक महामंत्री स्वतंत्र कुमार मेहरोत्रा ने बताया कि लंबे समय से बैंक कर्मियों की मांग चली आ रही है। इसी के चलते पांच दिवसीय सप्ताह, कर्मचारियों के विरोध में बनाए जा रहे श्रम कानून पर रोक, बैंकों के निजीकरण को रोकने, आउटसोर्स बंद करने आदि की मांग की। इस मौके पर अध्यक्ष सत्यपाल सिंह, उपाध्यक्ष ललित कुमार तिवारी, संयोजक संगठन मंत्री अमित कुमार, रोबिन, संगठन मंत्री मयंक राना, सुनील चौधरी, निखिल कांडपाल आदि रहे।
हड़ताल में ये बैंक रहे शामिल
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक, नैनीताल बैंक, इंडियन बैंक, केनरा बैंक, आंद्रा बैंक, कूर्मांचल बैंक, यूनियन बैंक सहित निजी बैंकों में हिस्सेदारी की। जो निजी बैंक खुले थे, उनको हड़ताली बैंककर्मियों ने बंद कराया।
दो हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित
उत्तरांचल बैंक एंप्लाइज यूनियन के उपाध्यक्ष ललित कुमार तिवारी ने बताया कि शनिवार से बैंक बंद है। शनिवार, रविवार, सोमवार और अब मंगलवार को बैंक बंद रहे। अनुमान है कि रोजाना काशीपुर के बैंकों में 500 करोड़ का लेन-देन होता है। चार दिन बैंक बंद होने की वजह से करीब दो हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।
एक दिवसीय हड़ताल पर रहे सरकारी और निजी बैंककर्मी
गदरपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर गदरपुर क्षेत्र के सरकारी और निजी बैंक कर्मचारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। मंगलवार को बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने समेत अन्य लंबित मांगों को लेकर की गई।हड़ताल के चलते सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अधिकांश बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा, जिससे उपभोक्ताओं को असुविधों का सामना करना पड़ा। यूएफबीयू से जुड़े बैंक कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन, कार्य घंटे और कार्य दबाव से जुड़ी मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन गंभीरता नहीं दिखा रहा है। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन के लिए आवश्यक है, लेकिन इस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।







