गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। तहसील के बनकोट कस्बे के पास कोटली में नौवीं शताब्दी में कत्यूरी शासकों की ओर से बनाए गए विष्णु मंदिर को सौंदर्यीकरण की दरकार है। इस मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है।ऐतिहासिक विष्णु मंदिर के चारों ओर सात अन्य छोटे-छोटे देवालय हैं। मुख्य मंदिर के चारों ओर कोर्णिक भाग में लघु देव कुलिकाओं का निर्माण किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में कृष्ण और बलराम की दुर्लभ मूर्तियां हैं। उत्तराखंड का यह अकेला ऐसा मंदिर है जिसमें कृष्ण और बलराम की मूर्तियां हैं। इन मंदिरों का निर्माण विभिन्न चरणों में किया गया है। केंद्र में भगवान विष्णु के मंदिर के चारों ओर सात अन्य लघु मंदिर निर्मित हैं।
आठ मंदिरों के समूह में यह मुख्य मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। फंसाणा शैली में धूसर रंग के बलुवा पत्थर से निर्मित मुख्य मंदिर पश्चिमाभिमुखी है। मंदिर वेदीबंध, जंघा एक्स आयताकार छत एवं शिखर पर आमलक के साथ निर्मित है। मंदिर की वाह्य दीवारें सादी तथा अलंकरण विहीन हैं। गर्भगृह में विष्णु प्रतिमा के साथ शेषशायी विष्णु एवं गणेश की मूर्तियां प्रतिमाएं भी हैं। अन्य छोटे मंदिर भी बलुवा पत्थर से बने हैं जिनका गर्भगृह वर्गाकार है। इन मंदिरों में महिषासुरमर्दिनी, गंगा, यमुना, बाराह, बलराम आदि की प्रतिमाएं विद्यमान हैं। संवाद
पर्यटन की दृष्टि से हैं महत्वपूर्ण
जिला पंचायत सदस्य राजेश कुमार, बनकोट के प्रधान रोहित बनकोटी, क्षेत्र पंचायत सदस्य कृष्ण अवतार सिंह बनकोटी का कहना है कि पर्यटन की दृष्टि से कोटली विष्णु मंदिर काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मंदिर का सौंदर्यीकरण किया जाना बेहद जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता अभिनेश बनकोटी ने बताया कि मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त किए जाने को लेकर वह पूर्व में पर्यटन मंत्री से मिले हैं। मंत्री ने सौंदर्यीकरण का भरोसा दिलाया है।







