दालमंडी में चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 20 दिनों बाद शनिवार को एक बार फिर बुलडोजर की धमक सुनाई दी। सुबह से ही इलाके में प्रशासनिक हलचल तेज रही और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच ध्वस्तीकरण की तैयारी शुरू कर दी गई।विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस चरण में कुल 43 भवनों को गिराया जाना है। भवन स्वामियों को शुक्रवार को ही अंतिम सूचना दे दी गई थी, जबकि इससे पहले क्षेत्र में मुनादी कराकर लोगों को मकान खाली करने के निर्देश दिए गए थे।शनिवार सुबह से ही दालमंडी क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा। ध्वस्तीकरण की आशंका के चलते अधिकांश दुकानों पर ताले लटके मिले। स्थानीय व्यापारियों और मकान मालिकों में कार्रवाई को लेकर चिंता का माहौल दिखाई दिया। सुबह 10 बजे से बुलडोजर कार्रवाई प्रस्तावित थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और प्रशासनिक तैयारियों के कारण दोपहर बाद कार्रवाई शुरू हो सकी। मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस और पीएसी के जवान भी तैनात रहे।
पुलिस बल तैनात
लोक निर्माण विभाग की ओर से चिन्हित 43 भवनों को तत्काल खाली करने का निर्देश दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि चौड़ीकरण परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों को जाम से राहत मिलेगी।चौड़ीकरण परियोजना के तहत अब तक 181 भवनों में से 61 भवनों की रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को अब तक करीब 39 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक तीन दिनों के भीतर 43 चिन्हित भवनों के ध्वस्तीकरण का लक्ष्य रखा गया है।स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि वे अपने सामान और संपत्तियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकें। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई जनहित और यातायात सुधार के उद्देश्य से की जा रही है और तय समयसीमा में इसे पूरा कराया जाएगा।







