गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) । चहज के पांडव मंदिर में आयोजित जागर में भीम और हिडिंबा के विवाह की कथा सुनाई। कथा सुनने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।जगरिया इंद्र सिंह भंडारी, पूरन सिंह भंडारी ने 14 वें दिन महाभारत की कथा सुनाते हुए कहा कि भीम और हिडिंबा का विवाह महाभारत की एक महत्वपूर्ण घटना है। भीम ने नरभक्षी राक्षस हिडिंबा का वध करने के बाद उसकी बहिन से विवाह किया था। कुंती की इस शर्त पर विवाह हुआ था कि भीम केवल संतान प्राप्ति तक ही हिडिंबा के साथ रहेंगे। उन्होंने बताया कि पांडव वनवास के दौरान एक घने जंगल में पहुंचे। हिडिंबा के साथ गंधर्व विवाह के बाद घटोत्कच नामक शक्तिशाली पुत्र का जन्म हुआ। पुत्र जन्म के बाद हिडिंबा अपने वचन का पालन करते हुए पुत्र घटोत्कच को पांडवों की सेवा के लिए छोड़कर वन में चली गईं। इस मौके पर लक्ष्मण सिंह, जागर कमेटी अध्यक्ष षष्ठी बल्लभ जोशी, प्रकाश चंद्र जोशी, नवीन जोशी, दिनेश जोशी, राजू जोशी, महिपाल बुंगला, धीरज बिष्ट, कंचन जोशी, रजत जोशसिमेत श्रोता मौजूद रहे।
भीम और हिडिंबा के विवाह की कथा सुनाई
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