उप-निबंधक कार्यालय में जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान स्टांप चोरी और भारी अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हुआ है। रजिस्ट्रार की गैर-मौजूदगी में रजिस्ट्रियां करने और औद्योगिक भूखंडों के अवैध बंटवारे जैसे गंभीर मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने महीनों से लंबित दस्तावेजों को सीज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल ने तहसील स्थित उपनिबंधक (रजिस्ट्रार) कार्यालय का दोपहर एक बजे निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्रार कार्यालय से एक्ट के अनुसार जितने दिनों में दस्तावेज लौटाने होते हैं, वह नहीं लौटाए जा रहे थे। इस प्रक्रिया में देरी हो रही है। यदि कोई नकल रजिस्ट्री ऑनलाइन मांग रहा है तो उसे ऑनलाइन ही देनी है, उसमें चार दिन से ज्यादा नहीं लगा सकते।रजिस्ट्री करते समय यह नजर आ रहा है कि प्रॉपर्टी की वास्तविकता से कम शुल्क जमा किया गया है। इसके लिए सर्किल रेट की सूची, व्यावसायिक औद्योगिक नोटिफाइट एरिया की सूची रहती है। विभाग के पास सभी संसाधन हैं। हम राजस्व की चोरी रोक सकते हैं।
आमजन को जो असली दस्तावेज लौटाने हैं वह भी आठ-आठ महीने बाद भी यहां पर पाए गए हैं। रजिस्ट्रार कार्यालय में अभिलेख रजिस्टर भी आधे अधूरे पाए गए। कई अभिलेखों में कूट रचना भी पाई गई। बिना सब रजिस्ट्रार की उपस्थिति में भी रजिस्ट्री की जा रही हैं जो अनुमन्य नहीं हैं। इस बारे में आगे की कार्रवाई की जाएगी। जो दस्तावेज नहीं लौटाए गए थे उन्हें सीज कर दिया गया है।जो ऑनलाइन चालान, ऑनलाइन रजिस्ट्री की नकलें मांगी गई थी उसमें यह देखा गया है कि तीन-चार दिन में दी जानी थी, वहां महीनों पुरानी 100-100 इंट्री देखी गई हैं, उन्हें कब्जे में लिया गया है। वहां पर पीड़ित पक्ष थे, जो बिना सब रजिस्ट्रार की उपस्थिति के पंजीकरण किए जा रहे थे। उन्होंने भी स्वयं आगे आकर बयान दिया है। इस बारे में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
फर्जी कर्मचारी कर रहा था कार्यालय में काम
निरीक्षण दौरान कार्यालय में फर्जी कर्मचारी काम करते हुए मिला। जानकारी लेने पर कर्मचारी का न तो कोई नियुक्ति पत्र न उपस्थिति पंजिका में नाम मिला। डीएम ने कार्यालय में काम करने वाले सभी कर्मियों का रिकाॅर्ड तलब किया।







