देहरादून में जमशेदपुर के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। हत्या की खबर मिलते ही उनके सुल्तानपुर पट्टी के छोई मार्ग स्थित अमृत स्टोन क्रशर पर सन्नाटा छा गया। लोग आपस में तरह-तरह की चर्चा करते नजर आए।मृतक विक्रम शर्मा ने एक दशक पहले झारखंड से आकर यहां स्टोन क्रशर स्थापित किया था। किसी मामले में गिरफ्तारी के बाद उनका छोटा भाई अरविंद शर्मा ही क्रशर को संभालते थे। जेल से बाहर आने पर उन्होंने क्रशर को फिर अपने हाथ में ले लिया था। क्रशर से तीन किमी की दूरी पर गांव पिपलिया में विक्रम शर्मा का मकान है।कुछ दिन रहने के बाद वह परिवार के साथ देहरादून जाकर शिफ्ट हो गए थे। वर्तमान में उनके गांव पिपलिया स्थित मकान में कोई नहीं रहता है। उनका एक छोटा भाई अरविंद शर्मा भी काशीपुर में रहता है। खनन कारोबार से जुड़ने पर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अच्छी पैठ बना रखी थी।
क्रशर का हिसाब किताब लेने के लिए वह एक दो महीने में आते रहते थे। जानकारी के अनुसार मृतक के पिता अमृत लाल शर्मा टाटा स्टील कंपनी में नौकरी करते थे। सेवानिवृत्त होने पर वह देहरादून में बस गए थे जबकि मूल रूप से अमृत लाल शर्मा देहरादून के ही रहने वाले थे।विक्रम शर्मा की हत्या होने की खबर मिलते ही छोई मार्ग स्थित अमृत स्टोन क्रशर पर सन्नाटा छा गया। क्रशर का संचालन भी बंद कर दिया गया जिस पर क्रशर पर इक्का दुक्का कर्मचारी ही दिखे।विक्रम शर्मा के बारे में क्षेत्र के खनन कारोबारी अनभिज्ञ थे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विक्रम शर्मा लोगों के साथ शालीनता से पेश आते थे। कई मजूदरों ने बताया कि उनके मालिक विक्रम शर्मा उनकी हर समय मदद करने के लिए तैयार रहते थे। कभी उन्हें परेशान नहीं किया।







