अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक शाखा अल्मोड़ा में लोन घोटाले पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बैंक के मैनेजर ने 20 नवंबर को अल्मोड़ा कोतवाली में तहरीर दी लेकिन 89 दिन से पुलिस तहरीर दबाए बैठी है।उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड अल्मोड़ा के प्रबंधक समीर भटनागर ने अल्मोड़ा कोतवाली में तहरीर दी। इसमें आरोप है कि एलआर शाह रोड के एक बिल्डकाॅम कंपनी के प्रोपराइटर और शापिंग कांप्लेक्स प्रोपराइटर, उनकी पत्नी के साथ ही बैंक के अफसरों पर ऋण के नाम पर रक्षित दस्तावेज और कोलेटरल सिक्योरिटी पलेखन (ऋण सुरक्षा के लिए इक्वीटेवल मार्गेज संपत्ति कम लेने) में धोखाधड़ी की गई।तहरीर के अनुसार तीन मई 2017 को दो कराेड़ की ऋण सीमा स्वीकृत हुई।
25 मई 2017 को इसे सात करोड़ कर दिया गया जबकि सात करोड़ की धनराशि की सुरक्षा के लिए जो मानक तय थे उसका पालन नहीं किया गया। इसे बैंक ने धोखाधड़ी माना है। इसकी जांच एमडी के निर्देश पर एजीएम ने की थी। मामला सही मिला तो प्रबंधक ने बिल्ड कॉम के डायरेक्टर, शापिंग कांप्लेक्स संचालक, उनकी पत्नी, बैंक के तत्कालीन महाप्रबंधक, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक, तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ कागजों में हेराफेरी कर ऋण प्राप्त करने पर लोकहित एवं जनधन की सुरक्षा को देखते हुए प्राथमिकी के लिए तहरीर दी।अल्मोड़ा कोतवाल योगेश उपाध्याय ने बताया कि जांच जारी है। बैंक और आरोपी के खिलाफ लोन जमा करने को कुछ समय मिलने की बात सामने आई थी। इसका अपडेट अभी नहीं लिया है। जल्द ही इस मामले में विधिक कार्रवाई करेंगे।







