महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू) का पांच दशकों का सफर उपलब्धियों भरा है। नैक मूल्यांकन में परचम लहराने की बात हो या विदेशी संस्थाओं से शैक्षिक साझेदारी का मामला, रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने हर क्षेत्र में उत्कृष्टता को नए सिरे से परिभाषित किया है। शनिवार को स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि रुहेलखंड क्षेत्र के नौ जिलों बरेली, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में फैले विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों का समूह है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने नैक मूल्यांकन में चार में से 3.6 अंक हासिल कर ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त किया है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय यह उपलब्धि हासिल करने वाला प्रदेश का चौथा विश्वविद्यालय बन गया है। यूजीसी से भी विश्वविद्यालय को प्रथम श्रेणी मिली है और ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 में डायमंड बैंड हासिल किया है। 3.75 अंकों के साथ वैश्विक स्तर पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय 721वें स्थान पर है।
पीएम उषा योजना के तहत मिला सौ करोड़ रुपये का अनुदान
उन्होंने बताया कि एनआईआरएफ रैंकिंग में विश्वविद्यालय ने राज्य विश्वविद्यालयों की श्रेणी में 51–100 बैंड हासिल किया है। पीएम उषा योजना के तहत 100 करोड़ रुपये का अनुदान मिला। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये भी मिले हैं। रुहेलखंड इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर को उद्यमिता के विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये मिले हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स अमेरिका, सूमी स्टेट यूनिवर्सिटी यूक्रेन, नेशनल फॉर्मोसा यूनिवर्सिटी ताइवान और वोल्कानी इंस्टीट्यूट इस्राइल सहित अन्य प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित किए हैं। छात्रों की डिग्री और शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए ब्लॉकचेन-आधारित भंडारण को अपनाया है, ताकि दुनियाभर में कभी भी ये सुलभ हो सकें। वर्ष 2024-25 में 44 विषयों में 110 पीएचडी प्रदान करने के साथ ही 1,748 पीएचडी शोध प्रबंधों को शोधगंगा प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया। शोध आउटपुट काफी बढ़ा है। प्रशासनिक सेवाओं सहित खेलों में भी रुविवि के विद्यार्थियों ने नाम रोशन किया है।
दस साल बाद मिला भवन, अब वैश्विक रैंकिंग बढ़ा रही शान
रुहेलखंड विश्वविद्यालय को अपनी इमारत 15 फरवरी 1985 को मिली। तब कैंपस में छात्रावास नहीं थे। एमएससी प्लांट साइंस व एनिमल साइंस, एमए इतिहास व अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम ही संचालित थे। इसके बाद शिक्षा, विधि व व्यवसाय प्रबंधन विभाग खोले गए। वर्ष 1995 में अभियांत्रिकी, होटल प्रबंधन सहित अन्य विभाग खुले। 51 वर्ष की यात्रा में रुहेलखंड विवि ने नैक मूल्यांकन में ए प्लस श्रेणी में जगह बनाई। कई वैश्विक रैंकिंग में भी दबदबा कायम किया। इस समय विवि में 55 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।







