ऋषिकेश नगर निगम के स्वच्छता के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई अब जनता के सामने है। बहता पानी और कूड़े के ढेर सिस्टम की उस लापरवाही का सबूत हैं, जिसे नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं है। वर्ष 2008 में निर्मित आस्था पथ की देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी गई थी। त्रिवेणी घाट से लेकर बैराज पुल तक करीब तीन से चार किलोमीटर लंबा यह आस्था पथ कभी सैरगाह और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। रखरखाव के अभाव में आस्था पथ की सुंदरता फीकी पड़ चुकी है। सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम ने एक निजी कंपनी को प्रतिमाह नौ लाख रुपये में ठेका दिया। लेकिन हालात यह हैं कि आस्था पथ पर जगह-जगह फैली गंदगी, सुबह से शाम तक बहता पानी और झाड़ियां उगी हुई हैं। सफाई के नाम पर आस्था पथ पर केवल कुछ ही कर्मचारी नजर आते हैं। सवाल यह है कि जब कागजों में 60 कर्मचारी तैनात हैं, तो फिर आस्था पथ की यह दुर्दशा क्यों बनी हुई है। ऋषिकेश के नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने बताया कि समय-समय पर आस्था पथ का निरीक्षण किया जाता है। यदि ऐसा है तो सफाई निरीक्षक को भेज कर तत्काल दिखवाया जाएगा।
फिर भी बदहाल आस्था पथ 60 सफाईकर्मी और नौ लाख का खर्च
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