उत्तराखंड में न्यायालयों को उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल डार्क वेब के टोर नेटवर्क से भेजे गए हैं। इन सभी ई-मेल के सर्वर विदेशों में होते हैं जिनसे भेजने वाले की पहचान बेहद मुश्किल होती है। ताजा ई-मेल मेलटूटोर जैसी गुमनाम ईमेल सेवा का इस्तेमाल कर की गई हैं।इनकी जांच में एसटीएफ और साइबर पुलिस की विशेष टीमें जुटी हुई हैं। इस तरह की सेवाओं के सब्सक्रिप्शन के लिए अच्छी खासी रकम ली जाती है। यह रकम इसीलिए ली जाती है ताकि ई-मेल करने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जा सके। लिहाजा जांच एजेंसियां भी इसमें मजबूर दिखाई देती हैं।प्राथमिकी जांच में पता चला है कि इन ई-मेल को टोर नेटवर्क के जरिये रूट किया गया। मेलटूटोर एक ऐसी गेटवे सेवा मानी जाती है, जो सामान्य ईमेल को डॉट ऑनियन पते से जोड़ती है, जिससे प्रेषक की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है।
डॉट ऑनियन एक विशेष प्रकार का इंटरनेट डोमेन होता है जो सामान्य ब्राउजर क्रोम या सफारी से नहीं खुलता है। इसे खोलने के लिए द ऑनियन राउटर (टोर) ब्राउजर की जरूरत पड़ती है। पुलिस के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि टोर नेटवर्क एक प्राइवेसी आधारित सिस्टम होता है। यह इस्तेमाल करने वाले की पहचान और स्थान छिपाने के लिए इसे अलग-अलग परतों में डायवर्ट करता है। इसे ही ऑनियन रूटिंग कहा जाता है।ये सब ई-मेल सेवाएं डार्क वेब पर मौजूद होती हैं जिसमें घुसना ही एक टेढ़ी खीर मानी जाती है। हालांकि एसटीएफ और साइबर पुलिस ई-मेल हेडर, आईपी लॉग, सर्वर रूटिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही हैं। अब तक मिली धमकियों के बाद प्रदेश में उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग थाने में प्राथमिकियां भी दर्ज की गई हैं।इनकी जांच के लिए विशेष टीमें भी बनाई गई हैं। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि इस मामले में गहनता से पड़ताल की जा रही है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के आधार पर जिन प्रदेशों में इस तरह की धमकियां मिली हैं उनकी जांच एजेंसियों से भी लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है।







