Thursday, March 19, 2026
advertisement
Homeउत्तराखण्डजंग लगा सिस्टम पूरी तरह फेल साबित 45 मिनट तक नहीं खुली...

जंग लगा सिस्टम पूरी तरह फेल साबित 45 मिनट तक नहीं खुली हाइड्रॉलिक क्रेन थमती चली गईं सांसें

राजधानी का फायर सेफ्टी सिस्टम पालम के दर्दनाक हादसे में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। आग लगने की प्राथमिक सूचना मिलने के बाद पहुंची राहत बचाव की टीम जिन आपात उपकरणों के लेकर पहुंची उसे तुंरत चालू नहीं किया जा सका। इससे बचाव दल तब तक हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहा जब तक करीब 20 किलोमीटर दूर कनाट प्लेस से दूसरी टीम उपकरणों के साथ नहीं पहुंची।इसमें करीब 45 से 60 मिनट तक नाजुक वक्त बेकार चला गया। बेबस परिवार जान बचाने की गुहार लगाता रह गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाइड्रोलिक ब्रांटो स्काई लिफ्ट समय पर काम करती तो शायद कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन तकनीकी खराबी और राहत कार्य में करीब एक घंटे की देरी ने हालात ऐसे बिगाड़ दिए कि आग ऊपरी मंजिल तक फैल गई और हादसा तीन साल की बच्ची समेत नौ लोगों की मौत की त्रासदी में बदल गया।

घटना की सूचना सुबह 07:04 बजे दमकल विभाग को मिली और पहला आपात दस्ता 15 से 20 मिनट में मौके पर पहुंचा लेकिन जिस ब्रांटो स्काई लिफ्ट से राहत की सबसे ज्यादा उम्मीद थी, वह मौके पर पहुंचने पर बेकार साबित हुआ। उसका हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हो गया और वह ऊपर उठ ही नहीं सका। यानी जिस मशीन पर जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी थी, उसने मौके पर दगा दे दिया। पहली ब्रांटो के फेल होने पर दूसरी गाड़ी बुलायी गई जो कनॉट प्लेस दमकल केंद्र से पहुंची लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।स्थानीय लोगों के अनुसार, कमल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ बालकनी में खड़े होकर लगातार मदद की गुहार लगा रहे थे। मौके पर मौजूद दमकल की गाड़ी के पास इतनी ऊंची सीढ़ी भी नहीं थी कि तीसरी मंजिल तक पहुंच सके। जाल या रस्सी तक नहीं थे, जिसकी मदद से उन्हें नीचे सुरक्षित उतारा जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि पालम के रामचौक मार्केट से द्वारका सेक्टर-6 दमकल केंद्र की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। इसके बाद भी वाहन को आने में इतनी देर लग गई।

6:30 बजे एक फूल बेचने वाले ने आग देखकर पड़ोसियों को किया था सूचित
स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह लगभग 6:30 बजे एक फूल बेचने वाले ने आग देख पड़ोसियों को सूचित किया। पुलिस के अनुसार आग की जानकारी लगभग 7:04 बजे पालम गांव थाना को मिली, जिसके बाद टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय निवासी मुकेश ने बताया कि आग तुरंत फैल गई थी। आग से पीड़ित परिवार के कुछ सदस्य बालकनी में आ गए थे लेकिन हाइड्रोलिक क्रेन नहीं खुली। स्थानीय निवासी आशीष गुप्ता ने बताया कि दूसरी हाइड्रोलिक क्रेन आने में आधा घंटे से ज्यादा का समय लग गया। पड़ोसी रघुनंदन ने कहा कि फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक मशीन करीब 45 मिनट तक काम नहीं कर पाई। दूसरी फायर टेंडर को आने में लगभग 50 मिनट लगे। पड़ोसियों ने बताया कि घर में रखे माल, जैसे अंडरगारमेंट और कॉस्मेटिक सामान, अत्यंत ज्वलनशील थे, जिससे आग तेजी से फैली।

तो अधिकारी अपनों की भी नहीं सुनते
सूत्रों के मुताबिक, द्वारका स्थित ब्रांटो स्काई लिफ्ट लंबे समय से जुगाड़ के सहारे चल रही है। उसका हाइड्रोलिक सिस्टम पुराना है और केवल चेसिस नया लगाया गया है। दमकल कर्मियों ने इस खामी की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही दे रखी थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

करोड़ों का बजट फिर भी संसाधन न के बराबर
दिल्ली अग्निशमन विभाग का वित्तीय वर्ष 2025-2026 में दिल्ली सरकार ने 500 करोड़ के बजट का प्रावधान किया था लेकिन इस घटना के बाद से स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि इस बजट का क्या करें जब जरूरत के समय आपात मशीन ही काम न आए। इस वर्ष आग में झुलसने से 24 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकल विभाग भारी संख्या में संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। 70 फायर स्टेशनों के लिए 90 अधिकारियों की आवश्यकता है जबकि मौजूदा समय में 18 ही कार्यरत हैं। इनमें भी 12 अधिकारी जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। 2012 के बाद से स्टेशन अफसरों की भर्ती तक नहीं हुई है।

कैब चालक ने लगाए गंभीर आरोप
कपल स्कूल कैब चालक कमल ने बताया कि करीब 40 लोग, जिनमें स्थानीय और फायर कर्मी शामिल थे, शोरूम का शटर तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। आग और बिजली के जलने के कारण शटर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। कमल ने आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड के उपकरण काम नहीं कर पाए। जब फायर ब्रिगेड आई, तो उसके प्रेशर सिस्टम में खराबी थी। यदि उपकरण समय पर काम करता तो कुछ लोगों को बचाया जा सकता था।

दीवार तोड़ने की कोशिश की थी
पड़ोसी रघुनंदन शर्मा ने बताया कि वह पास की छत पर जाकर दीवार का हिस्सा तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन धुआं इतना घना था कि अंदर जाना असंभव था। उन्होंने आग लगने वाले भवन की सामने की खिड़की तोड़ने की भी कोशिश की लेकिन धुआं बहुत घना होने के कारण सफलता नहीं मिली।

हर साल हुई है दर्जनों की मौत
25 मई 2024 : विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यू बोर्न अस्पताल में भीषण अग्निकांड में सात नवजात शिशुओं की जान चली गई थी।
8 फरवरी 2024 : अलीपुर स्थित एक अवैध केमिकल व पेंट फैक्ट्री में आग लगने से 11 लोगों की मौत।
13 मई 2022 : मुंडका स्थित अवैध फैक्ट्री में लगी आग से 27 लोगों की मौत हुई।
21 जून 2021 : पीरागढ़ी स्थित फैक्ट्री में लगी आग से 6 लोगों की मौत हुई।
8 दिसंबर 2019 : अनाज मंडी स्थिति अवैध फैक्ट्री मेें आग लगने से 43 लोगों की मौत हुई।
12 फरवरी 2019 : करोल बाग स्थित होटल में लगी से 17 लोगों की मौत हुई।
20 जून 2018 : बवाना में एक फैक्ट्री में लगी से 17 लोगों की मौत हुई।
13 जून 1997 : दिल्ली का सबसे बड़ा अग्निकांड उपहार सिनेमा, ग्रीन पार्क में हुआ था, इसमें 59 लोगों की मौत हुई थी।
13 जून 1997 – दिल्ली का सबसे बड़ा अग्निकांड उपहार सिनेमा, ग्रीन पार्क में हुआ था, इसमें 59 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल घायल हुए थे।

उपकरणों की खराबी की जांच शुरू
अधिकारियों ने आग के कारणों और बचाव में देरी तथा उपकरणों की खराबी की जांच शुरू कर दी है। अमर उजाला ने दमकल विभाग के चार अधिकारियों से हाइड्रोलिक क्रेन की खराबी को लेकर बात करने की कोशिश की तो सभी ने कहा कि एसके दुआ बताएंगे, वह मौके पर गए थे। मगर अधिकारी एसके दुआ ने फोन ही नहीं उठाया।

spot_img
spot_img
spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine
https://bharatnews-live.com/wp-content/uploads/2025/10/2-5.jpg





Most Popular

Recent Comments