हल्द्वानी के कालाढूंगी रोड स्थित लामाचौड़ पुलिस चौकी के पीछे जंगल में बृहस्पतिवार सुबह सवा 11 बजे घास काट रही पीपल पोखरा निवासी गंगा देवी (66) पत्नी प्रेम भारती को बाघ ने शिकार बना लिया। बाघ को देखकर मौके पर मौजूद बहू पुष्पा और पड़ोसी हेमा जोशी की सांसें अटक गईं। उनकी सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से दो किलोमीटर ऊपर से डेढ़ घंटे बाद शव बरामद किया। मुखानी थानाक्षेत्र के पीपल पोखरा गांव निवासी किसान प्रेम भारती की पत्नी गंगा देवी बृहस्पतिवार सुबह साढ़े दस बजे बहू पुष्पा गोस्वामी और गांव की ही हेमा जोशी के साथ रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज के जंगल में घास काटने के लिए गई थी। लामाचौड़ पुलिस चौकी के बगल से वह जंगल में ढाई से तीन किलोमीटर अंदर जाकर अलग-अलग जगहों पर घास काटने लगीं। हेमा जोशी के अनुसार कुछ समय बाद उसे घसीटे जाने की आवाज आने लगी। वह और पुष्पा तेजी से गंगा देवी की ओर दौड़ी। कुछ ही दूरी पर गंगा देवी जमीन पर लहूलुहान पड़ी थी। उनके बाएं पैर, कंधे, हाथ, पीठ पर बाघ ने काटा था।
वह तड़प रही थीं। पास ही में बाघ खड़ा था। बहू पुष्पा के अनुसार उसने दराती दिखाई तो बाघ वापस जाने लगा। मौका पाकर दोनों गंगा देवी को चंद मीटर नीचे लाई लेकिन बाघ फिर उनकी ओर आया। इस पर वह डर कर वहां से भागी और मुख्य मार्ग पर आकर लोगों को जानकारी दी।प्रधान विनोद सिंह निगल्टिया सहित कई ग्रामीण वन विभाग की टीम और दोनों महिलाओं के साथ जंगल में गए। घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर ऊपर गंगा देवी का क्षत-विक्षत शव पड़ा था। बाघ ने महिला की गर्दन का हिस्सा खा लिया था। रेंजर प्रदीप कुमार के अलावा मुखानी थाना पुलिस के जवान शव को चादर पर लपेटकर नीचे लाए। यहां से शव मोर्चरी भेजा गया।
ट्रेंक्यूलाइज होगा बाघ, लगाएंगे कैमरा ट्रैप
वन विभाग ने बाघ को पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। उसे ट्रेंक्यूलाइज करने का निर्देश डीएफओ ने दिया है। बाघ की पोजिशन जानने के लिए कैमरे भी लगाए जाएंगे। इसके साथ ही ग्रामवासियों से अगले एक माह तक जंगल में न जाने को लेकर वनाधिकारियों ने लोगों को समझाया है।महिला के कटे अंगों के बीच खून में वन्यजीव के बाल मिले हैं। यह बाघ का ही हमला है। स्थानीय पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। बाघ को पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। महिला के परिजनों को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस समय वन्य जीव का प्रजनन काल होता है और वह आक्रामक रहते हैं। ऐसे में जंगल में जाने से बचा जाए। – ध्रुव सिंह मर्तोलिया, डीएफओ, रामनगर वन प्रभाग







