Saturday, January 10, 2026
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उत्तराखंड हाईकोर्ट : सरकारी कल्याणकारी योजना में धोखाधड़ी एक गंभीर अपराध

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत फर्जी क्लेम करने के आरोपी अस्पताल संचालकों और कर्मियों को राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने काशीपुर के जन सेवा अस्पताल से जुड़े डॉ. विशाल हुसैन और फार्मासिस्ट अनुराग रावत की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी।मामले के अनुसार जिला ऊधम सिंह नगर के काशीपुर स्थित जन सेवा अस्पताल में सरकारी कल्याणकारी आयुष्मान योजना के नाम पर फर्जी बिल बना कर धनराशि हड़पने का खेल चल रहा था। अस्पताल इस योजना के तहत पैनल में शामिल था। स्टेट हेल्थ एजेंसी ने जांच में पाया कि अस्पताल ने इलाज के फर्जी कागजात, रेफरल स्लिप और डायग्नोस्टिक रिपोर्ट तैयार कर सरकार से गलत तरीके लगभग 6.66 लाख रुपये का गलत दावा किया था। मामला खुल जाने पर अस्पताल ने बाद में यह राशि प्रशासन को लौटा दी। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत भी मुकदमे दर्ज किए थे।

याचिकाकर्ता अस्पताल के निदेशक डॉ. विशाल हुसैन ने दलील दी कि यह केवल एक प्रशासनिक और अनुबंध संबंधी विवाद था और धनराशि वापस कर दी गई है, इसलिए आपराधिक कार्यवाही बंद कर दी जाए। फार्मासिस्ट अनुराग रावत ने कहा कि वह एक सरकारी फार्मासिस्ट हैं और क्लेम अपलोड करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।हाईकोर्ट ने आरोपितों की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राशि लौटाना काफी नहीं है, पैसे की वसूली होने से आपराधिक दायित्व खत्म नहीं हो जाता। सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में धोखाधड़ी करना एक गंभीर आर्थिक अपराध है। कोर्ट ने माना कि चार्जशीट में फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड, डिस्चार्ज समरी और इलाज के चार्ट के विशिष्ट उदाहरण दिए गए हैं। ये कागजात असली थे या फर्जी, इसका फैसला ट्रायल के दौरान सबूतों के आधार पर होगा। चार्जशीट में आरोपितों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता दिख रहा है, इसलिए कार्यवाही को बीच में रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने डॉ. हुसैन और रावत की याचिकाओं को खारिज कर उन्हें पूर्व में मिली गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई। कोर्ट ने आदेश दिया कि आवेदकों को संबंधित निचली अदालत के समक्ष पेश होना होगा। हालांकि, उन्हें निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी गई है।

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