गंगा भोगपुर तल्ला क्षेत्र में वन गुर्जर ट्राइबल युवा संगठन से जुड़ी महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।संगठन से जुड़ी लगभग 30 महिलाएं अपनी आजीविका के लिए हस्तकला उत्पाद तैयार कर रही हैं। इनमें मोतियों से बने कान के बुंदे, गले के हार, बाजूबंद, ऊन से बनी टोपियां एवं गर्मी–सर्दी में उपयोग होने वाली दरियां शामिल हैं। इसके साथ ही गुर्जर बस्ती में पाली जा रही भैंसों के दूध से मट्ठा और शुद्ध देशी घी तैयार कर स्थानीय बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। महिलाएं शहद जैसे उत्पादों की बिक्री भी कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से जंगलों में रहकर जीवन यापन करती आ रही हैं और अब सरकार की ओर से महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं से उन्हें नई उम्मीद मिली है। वे चाहती हैं कि गुर्जर महिलाओं को भी सरकारी स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि वे अपने परिवार की आजीविका बेहतर ढंग से चला सकें।
परिचर्चा
संगठन की महिलाएं मिलकर घरों में पाली गई भैंसों से शुद्ध देशी घी तैयार कर बाजारों तक पहुंचा रही हैं। शहद जैसे उत्पादों की बिक्री भी हो रही है, जो उनके समाज में पहली बार हो रहा है। – आफरीन
महिलाएं जंगलों में रहकर छोटे स्तर पर स्वरोजगार कर रही हैं और घरेलू कामकाज के साथ ऊन की टोपी, दरियां और हाथ के पंखे बनाकर बाजारों में भेज रही हैं। – सलमा खातून
फिलहाल संगठन से 30 महिलाएं जुड़ी हैं। तैयार सामान को बाजार में बेचने के लिए उचित प्लेटफॉर्म की कमी है, जिससे काफी परेशानी होती है। सरकार से सहायता और स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की उम्मीद है। – जुलेखा







