विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (वीबीजी रामजी) की शुरुआत से पहले ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत अधूरे पड़े कार्यों ने प्रशासन के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक अप्रैल से मनरेगा को नए स्वरूप में लागू करने की केंद्र सरकार की योजना है।अभी चार वित्तीय वर्षों में शुरू हुए 12,346 कार्य पूरे नहीं हो सके हैं। इन अधूरे कामों से जुड़े 30 हजार से अधिक मजदूरों की मजदूरी और लगभग तीन करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री का भुगतान भी अटक गया है। मनरेगा के तहत कार्यों में देरी का मुख्य कारण समय पर बजट जारी न होना है।
सीमा 125 दिन करने का प्रस्ताव
इसके परिणामस्वरूप 10 ब्लॉकों में शुरू हुए 1,05,674 कार्यों में से केवल 93,328 ही पूरे हो पाए हैं, जो 88.32 फीसदी है। केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च तक सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नई व्यवस्था में सालाना रोजगार की सीमा 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है।
विवादों में फंसा चकरोड निर्माण
बिल्हौर ब्लॉक में वर्ष 2022-23 में शुरू हुआ चकरोड निर्माण विवादों में फंसकर शुरुआती चरण में ही रुक गया। मनरेगा नियमों के अनुसार 30 प्रतिशत से कम प्रगति वाले कार्यों में मजदूरी भुगतान संभव नहीं है जिससे काम बंद हो गया और मजदूरों का भुगतान अटक गया।
आंकड़ों में अधूरे कामों की हकीकत
वित्तीय वर्ष शुरू कार्य अधूरे कार्य
2022-23 91,442 6,989
2023-24 7,926 2,069
2024-25 3,617 1,403
2025-26 2,689 1,885
जिले में करीब 1500 मजदूर कर रहे काम
जिले की 590 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्य कराए जाते हैं। वर्तमान समय में करीब 38 हजार से अधिक मजदूर पंजीकृत हो सके हैं। हालांकि अभी बायोमिट्रिक का कार्य हो रहा है। इसमें करीब 1500 मजदूर ही सकि्रय हैं। 252 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 5 लाख मानव दिवस सृजित हो सके हैं। जो भी अधूरे कार्य है उन्हें पूरे कराने के सभी बीडीओ को निर्देश दिए हैं। प्रयास है कि मार्च तक सभी अधूरे कार्य पूरे करा लिए जाएं। जो 30 फीसदी से कम काम है उसका भुगतान नहीं होगा। – चंद्रभान कनौजिया, उपायुक्त मनरेगा







