पंतनगर। विवि में शोध निदेशालय की ओर से 66वीं शोध सलाहकार समिति की दो दिवसीय बैठक प्रौद्योगिक महाविद्यालय में आयोजित की गई। इसमें कुलपति डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान ने विभिन्न परियोजनाओं में किए जा रहे शोध कार्यों की समीक्षा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उत्तराखंड में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में लाभ के लिए भविष्य की योजना विकसित करना था। कहा कि पर्वतीय कृषि व कृषकों की समस्याओं के हल के लिए शोध किए जाएं।बैठक में कुल नौ सत्रों में 59 शोध परियोजनाओं का कार्य विवरण अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत करने सहित भविष्य के शोध कार्यों के लिए सुझाव रखे गए। इस दौरान 150 से अधिक परियोजना समन्वयकों/अधिकारियों ने पिछले एक वर्ष में हुए शोधों की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। निदेशक एवं कुलपति एनडीआरआई करनाल डाॅ. धीर सिंह ने सुझाव दिया कि विवि को कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में शोध के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रयास करना चाहिए। निदेशक एवं कुलपति आईवीआरआई बरेली डाॅ. त्रिवेणी दत्त ने विकसित भारत 2047 के लिए नेक्स्ट जनरेशन एग्रीकल्चर पर जोर दिया।
निदेशक भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून डाॅ. एम. मधु ने कम बजट में अच्छा शोध करने सहित सभी विभागों की उपलब्धियों का वार्षिक विवरण तैयार करने और विभाग स्तर पर समीक्षा का सुझाव दिया। निदेशक विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा डाॅ. लक्ष्मीकांत ने शोध की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए बहुमूल्य सुझावों के साथ अगले पांच वर्ष की योजना बनाकर शोध करने का सुझाव दिया।अधिष्ठाता भरसार विवि डाॅ. अरविंद बिजलवान ने उच्च गुणवत्तायुक्त शोध पत्रों के प्रकाशन और इकोसिस्टम सर्विस आधारित कार्य करने पर बल दिया। इससे पूर्व निदेशक शोध डाॅ. एसके वर्मा ने विगत एक वर्ष के शोध कार्यों का विवरण प्रस्तुत करते हुए अगले एक वर्ष का रोडमैप प्रस्तुत किया। समापन पर संयुक्त निदेशक शोध डाॅ. पीके सिंह, डाॅ. मंजुल कांडपाल ने भी विचार रखे।







