बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले हाईवे को चाक-चौबंद बनाने के प्रशासन के दावे खोखले साबित हुए हैं। बदरीनाथ हाईवे पर जगह-जगह तीर्थयात्रियों को धूल भरी यात्रा करनी पड़ रही है। कमेड़ा, चटवापीपल, पर्थाडीप, मैठाणा, क्षेत्रपाल, गडोरा, भनेरपाणी, पागलनाला, बेलाकूची, गुलाबकोटी में हाईवे बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। यहां डामरीकरण न होने से वाहनों की आवाजाही धूल के गुबार उड़ रहे हैं।गुलाबकोटी, पर्थाडीप और भनेरपाणी में वनवे सिस्टम लागू किया गया है। इन जगहों पर हाईवे के क्षतिग्रस्त हिस्सों में सुधारीकरण कार्य चल रहा है। बेलाकूची में हाईवे किनारे करीब 40 मीटर लंबी दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है जिससे धूल उड़ रही है।कार्यदायी संस्था की ओर से यहां धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है। पर्थाडीप भूस्खलन क्षेत्र में सीमेंट कार्य चल रहा है, जिससे यात्रा वाहनों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी, पार्टी प्रवक्ता तेजवीर कंडेरी और ग्राम प्रधान रविंद्र नेगी का कहना है कि एक वर्ष बीत जाने पर भी बदरीनाथ हाईवे की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कार्यदायी संस्थाओं को समय पर बजट न मिलने के कारण भूस्खलन क्षेत्रों में सुधारीकरण कार्य आधा-अधूरा पड़ा हुआ है।लामबगड़ नाले में मोटर पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है इससे वाहनों की आवाजाही नाले से ही की जा रही है। यहां हाईवे बेहद खराब स्थिति में है। ज्योतिर्मठ से मारवाड़ी के बीच यात्रा वाहन हिचकौले खाकर बदरीनाथ जा रहे हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से सड़क पर पड़े गड्ढों में मिट्टी का भरान किया गया है। इससे धूल उड़ रही है। इधर, एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि बजट समय पर न मिलने के कारण भूस्खलन क्षेत्रों में काम पूरा नहीं हो पाया है। पर्थाडीप भूस्खलन क्षेत्र में हाईवे सुधारीकरण कार्य अंतिम चरण में है। यहां जल्द डामर भी बिछा लिया जाएगा।







