परमार्थ निकेतन में सूफी गायक कैलाश खेर पहुंचे। उन्होंने परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से मुलाकात कर भारतीय गुरुकुल परंपरा भजन, आध्यात्मिक संगीत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर गहन एवं प्रेरणादायी चर्चा की। सूफी गायक कैलाश खेर ने कहा कि भारत की भूमि अद्भुत है, जहां संगीत ही साधना है और स्वर ही उपासना है। भारतीय भजन परंपरा में केवल धुन नहीं, बल्कि ऋषियों की दृष्टि, संतों की करुणा और ईश्वर का स्पर्श समाहित है। जब कोई बालक गुरुकुल में वेद सुनता है, जब कोई मां घर में भजन गाती है, जब किसी घाट पर आरती गूंजती है, जब किसी मंदिर में शंख बजता है, तो वह केवल हमें शांति ही नहीं देता बल्कि भारत को भी जीवंत व जागृत बनाए रखता है। भारत केवल सीमाओं से नहीं, बल्कि संस्कारों, स्वरों और श्रद्धा से बनता है।







