बदरीनाथ-केदारनाथ में विशेष पूजा पर रोक लगा दी गई। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि सभी सामान्य तरीके से मंदिरों में दर्शन करेंगे। आज बदरीनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नाम से धाम में पहली पूजा हुई। वहीं सीएम धामी ने भी बदरी विशाल का आशीर्वाद लिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बाबा केदार के कपाट खुलने पर चारधाम यात्रा की देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों से पांच संकल्पों को अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले श्रद्धालु यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखते हुए, राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे उन्हें एक अलग संतुष्टि मिलेगी।
चारोंधाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य कें
प्रधानमंत्री ने संदेश में कहा, देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। बाबा केदार के दर्शन सहित चारधामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माध्वाचार्य ने भी अपने धर्म विचारों को समृद्ध करने के लिए बदरीनाथ की यात्रा की थी।हिमालय की गोद में विराजमान ये चारोंधाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं। हर वर्ष विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हुए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है।
विकसित भारत में विकसित उत्तराखंड की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। कुछ वर्ष पहले, उन्होंने बाबा केदार के द्वार पर खुद ये कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। जिससे श्रद्धालुओं, संतजनों और पर्यटकों को सुविधा हो रही है।
इन संकल्पों का आग्रह
पहला संकल्प : स्वच्छता सर्वोपरि
धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।
दूसरा संकल्प : प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहे। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, एक पेड़ मां के नाम जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
तीसरा संकल्प : सेवा, सहयोग और एकता पर बल
पुरातन काल से तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। तीर्थयात्री अपनी यात्रा के प्रत्येक दिन, किसी न किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें। देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़े। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।
चौथा संकल्प : वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
अपने मूल स्थान से चलकर घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।
पांचवां संकल्प : अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन
यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थयात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से इस आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा न हो। प्रधानमंत्री ने क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स से भी उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।







