Friday, May 15, 2026
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पंपों पर उमड़ी भीड़ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कुमाऊं में ईंधन संकट गहराया

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की तपिश अब कुमाऊं के पेट्रोल पंपों तक महसूस होने लगी है। तेल कंपनियों ने जहां उधार पर ईंधन देना लगभग बंद कर दिया है वहीं भुगतान के बाद भी पेट्रोल-डीजल की सप्लाई में देरी हो रही है। हालात ऐसे हैं कि हमेशा भरे रहने वाले टैंक अब आधे खाली नजर आने लगे हैं। ऐसे में लोगों में ईंधन संकट और कीमतों में बढ़ोतरी का डर बढ़ गया है। पंपों पर टैंक फुल कराने वालों की भीड़ उमड़ रही है। कुमाऊं मंडल में विभिन्न कंपनियों के 250 से अधिक पेट्रोल पंप हैं जिन्हें मथुरा और आंवला (बरेली) के पेट्रोलियम डिपो से ईंधन की आपूर्ति होती है। अकेले नैनीताल जिले में 88 पेट्रोल पंप संचालित हैं।

पंप कारोबारियों के मुताबिक कुमाऊं में रोजाना सात लाख लीटर डीजल और तीन लाख लीटर पेट्रोल की खपत है। पर्वतीय पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव के बाद पंप स्वामियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से जारी एसओपी का पालन किया। खाड़ी युद्ध से पहले तेल कंपनियां उन्हें हफ्तेभर तक का क्रेडिट (उधार) देती थी। अब वह पहले भुगतान करने के बाद ही ईंधन उपलब्ध करा रही हैं। यदि किसी पंप को शुक्रवार को पेट्रोल डीजल चाहिए तो उन्हें एक दिन पहले बृहस्पतिवार को ही कंपनियों को भुगतान करना पड़ रहा है। कई बार तो दो दिन पहले भुगतान करने के बाद भी पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई नहीं मिल रही है।

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