करीब तीन माह से अधिक का समय बीतने के बावजूद क्षेत्र में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। जिससे सूखी ठंड पड़ रही है। बारिश की कमी से खासकर रवि की फसलें गेहूं, चना, मसूर आदि प्रभावित हो सकती हैं।जहां सिंचाई की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हैं, वहां फसलें प्रभावित होनी शुरू हो गई हैं। मैदानी इलाकों में किसान नलकूप और नहरों से सिंचाई कर रहे हैं। डोईवाला ब्लॉक में करीब ढाई हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई की गई है। करीब एक हजार हेक्टेयर में चना और सात हजार हेक्टेयर में मसूर की बुआई की गई है।
डोईवाला विधानसभा में रायपुर ब्लॉक का थानो न्याय पंचायत का पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल होने के कारण रबी की फसल का रकबा इससे भी अधिक हो जाता है। रानीपोखरी और थानो न्याय पंचायत के पहाड़ी इलाकों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से गेहूं की फसल अधिक प्रभावित हो सकती हैं।किसान आदेश कृषाली ने कहा कि गेहूं की बुआई को एक माह से अधिक का समय हो चुका है। बारिश का पानी सिंचाई और खाद दोनों का काम करता है। बारिश से फसलों को सिंचाई के साथ ही कई कुदरती पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं। लेकिन इस बार तीन माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद अब तक बारिश नहीं हुई है।
पिछले वर्ष नौ अक्तूबर में हुई थी बारिश
देहरादून एयरपोर्ट पर नौ अक्तूबर को बारिश दर्ज की गई थी। जबकि पूरे अक्तूबर माह में कुल 4.8 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। उसके बाद से लेकर अब तक करीब तीन महीने बीतने के बावजूद बारिश बिल्कुल नहीं हुई है। बारिश नहीं होने के कारण सूखी ठंड पड़ रही है, जिससे लोगों को खासकर सुबह और शाम के वक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश की कमी के कारण मैदानी इलाकों से अधिक पहाड़ी क्षेत्रों में फर्क पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश कृषि भूमि बारिश पर ही निर्भर है। यदि कुछ और दिन बारिश नहीं हुई तो रबी की फसल पर बुरा असर पड़ सकता है। – अजय टम्टा, सहायक कृषि अधिकारी डोईवाला
ठंड के कारण सांस और दिल के मरीजों को खास ध्यान रखने की जरूरत है। अधिक ठंड होने पर ऐसे मरीजों को घर में ही रहना चाहिए या गर्म कपड़ों से पैक होकर ही बाहर निकलना चाहिए। – डॉ. केएस भंडारी, चिकित्साधीक्षक, सीएचसी डोईवाला







