देहरादून। दून अस्पताल में लागू की गई आभा आईडी की व्यवस्था मरीजों के लिए आफत बन गई है। शनिवार को कई मरीज पंजीकरण के लिए घंटों भटकते रहे। एक बहन दर्द से कराहते भाई के साथ पर्चा बनवाने के लिए दो घंटे तक भटकी। इसके बाद उन्हें इमरजेंसी जाना पड़ा।दून अस्पताल में अधूरी व्यवस्था व नियमों के साथ आभा आईडी की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। दावा है कि मरीजों की सहूलियत के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है लेकिन जब से यह व्यवस्था लागू की गई है मरीज को इलाज तो दूर पर्चा बनवाने में ही पसीने छूट रहे हैं। इसे सिस्टम की नाकामी का कारण माना जा रहा है। व्यवस्था के तहत मरीजों को मोबाइल में एक एप्लीकेशन डाउनलोड कर लॉगइन करना है। इसके बाद क्यूआर कोड स्कैन कर टोकन नंबर लेना होता है।इस वृहद प्रक्रिया में मरीजों को घंटों उलझना पड़ रहा है। शनिवार को अपने भाई को दिखाने आई अनीता ने बताया कि भाई के कान के पास गांठें हैं। वह दो घंटे से दर्द से कराह रहा था लेकिन पर्चा नहीं बन पा रहा था। उनके आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है। ऐसे में आभा आईडी बनाने में दिक्कत आ रही है। जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्हें भाई को लेकर इमरजेंसी जाना पड़ा। इसके अलावा अन्य मरीजों ने भी परेशानी झेली। संवाद
यह है आभा आईडी का उद्देश्य
अधिकारिक के मुताबिक आभा आईडी का उद्देश्य न सिर्फ पंजीकरण कराना है बल्कि मरीजों का समस्त स्वास्थ्य ब्योरा ऑनलाइन एप्लीकेशन पर दर्ज करना है। इसके लिए मरीजों और चिकित्सकों के लिए दो एप्लीकेशन हैं। मरीज ओपीडी में जाने के बाद चिकित्सक को टोकन नंबर बताएगा, इसके बाद चिकित्सक सभी दवाइयां और जांच पर्चे में लिखने के बजाय एप्लीकेशन में दर्ज करेंगे। इसके लिए प्रत्येक ओपीडी में कंप्यूटर रखे जाएंगे लेकिन ओपीडी में अब तक कम्प्यूटर नहीं लगाए गए हैं।
मरीजों ने बताई पीड़ा
अपने भाई को दिखाने आया था। यहां पर्चे के लिए कतार में लगे थे। नंबर आया तो पता चला कि पर्चा बनाने से पहले उन्हें आभा आईडी बनानी होगी। उनका नंबर आधार कार्ड से लिंक नहीं होने से दिक्कत आ रही है। – सोनू, तीमारदार
आभा आईडी के लिए एप्लीकेशन तो डाउनलोड कर लिया लेकिन उसके फीचर्स समझने में दिक्कत आ रही है। कुछ लोगों से जानकारी भी ली लेकिन कोई भी समाधान नहीं मिला। – प्रमोद सिंह रावत
पता ही नहीं है कि आभा आईडी क्या है, इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। उनके पास कीपैड फोन है। ऐसे में वे अपने फोन में एप डाउनलोड नहीं कर पा रहीं हैं। – जमुना देवी
आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। कोई भी स्वास्थ्यकर्मी मदद के लिए नहीं आ रहा है। कई लोगों से पूछ चुकी हूं लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में उन्हें काफी इंतजार करना पड़ा। – राजबाला
आंखों से देखने में असमर्थ हूं। परिजन इलाज के लिए लेकर आए थे। काफी देर से पर्चा बनवाने का प्रयास कर रहे हैं। आभा आईडी के नियम इसमें आड़े आ रहे हैं। करीब 40 मिनट बाद पर्चा बन पाया। – जोशी देवी
आभा आईडी कैसे बनाते हैं पता ही नहीं चल पा रहा है। करीब एक घंटा हो गया है, कतार में खड़े हैं। नंबर ही नहीं आ पा रहा है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। – शरीफ अली
आभा आईडी क्यों बनवानी आवश्यक हो गई, पता ही नहीं चल पा रहा है। यहां न तो कोई बताने वाला है और न ही इसे लॉगइन करने में मदद करने वाला है। – धर्म सिंह
पर्चा बनवाने के लिए घंटों से घूम रही हूं लेकिन आभा आईडी बनाने की उलझी हुई प्रक्रिया से उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसे में इलाज में भी काफी देरी हो रही है। – ऊषा
आभा आईडी से पंजीकरण में आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा सभी ओपीडी में कंप्यूटर लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। – डॉ. गीता जैन, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज
समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्यमंत्री को लिखा पत्र
दून अस्पताल में आभा आईडी से पंजीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य होने के बाद मरीजों को आ रही समस्या के समाधान के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी के सदस्य और राज्य आंदोलनकारी मोहन खत्री ने स्वास्थ्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने इसकी बाध्यता को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग और निराक्षर मरीजों को आभा पंजीकरण में दिक्कत आ रही है। इससे उनका इलाज प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था की वजह से कई मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।







