स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) के अंतर्गत हिमालयन कॉलेज ऑफ नर्सिंग जौलीग्रांट में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय मिडवाइव्स डे मनाया गया। इस वर्ष की थीम वन मिलियन मोर मिडवाइव्स रही। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित मिडवाइव्स की बढ़ती आवश्यकता के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि देवभूमि विश्वविद्यालय देहरादून की प्राचार्य डॉ. मेहविश खालिद ने वन मिलियन मोर मिडवाइव्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित मिडवाइव्स (दाइयों) की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में दाइयां स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी साबित हो सकती हैं।
बीएससी नर्सिंग चतुर्थ वर्ष, पोस्ट बेसिक और एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी, केस प्रेजेंटेशन, क्विज प्रतियोगिता और विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से मिडवाइव्स की भूमिका को प्रस्तुत किया।हिमालयन कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य डॉ. संचिता पुगाजंडी ने कहा कि मिडवाइव्स (दाइयां) केवल प्रसव सेवाओं तक सीमित नहीं हैं। वो महिलाओं और नवजात शिशुओं के संपूर्ण स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संवेदनशीलता, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता के साथ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कहा। कार्यक्रम में डॉ. कंचन बाला, डॉ. लक्ष्मी कुमारी, डॉ. रमा शर्मा, उपमा जॉर्ज, शमा परवीन, सपना नौटियाल आदि उपस्थित रहे।







