उत्तराखंड में अपना बिजली बिल जमा कराने वालों में गढ़वाल जोन के उपभोक्ता सबसे आगे हैं। यूपीसीएल की हालिया राजस्व रिपोर्ट में उपभोक्ताओं पर 920 करोड़ रुपये फंसे रह गए। ऋषिकेश, गैरसैंण के लोग बिल जमा कराने में आगे हैं जबकि श्रीनगर, पौड़ी व पिथौरागढ़ के उपभोक्ता बिल जमा कराने में फिसड्डी हैं।यूपीसीएल की रिपोर्ट में 10 महीनों का आंकड़ा दिया गया है। इस अवधि के दौरान कुल 9,556.65 करोड़ रुपये के बिल जारी किए गए जबकि उपभोक्ताओं से 8,636.47 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके। यह 90.37 प्रतिशत है। प्रदेश के चारों मुख्य जोनों की तुलना की जाए तो राजस्व वसूली के मामले में गढ़वाल का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है जबकि कुमाऊं जोन सबसे पीछे है।
गढ़वाल जोन ने 2,628.13 करोड़ रुपये के बिल के मुकाबले 2,444.53 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो 93.01 प्रतिशत है। हरिद्वार जोन में 3,019.76 करोड़ रुपये के बिल के मुकाबले 2,743.66 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो 90.86 प्रतिशत है। ऊधम सिंह नगर जोन में 1,928.66 करोड़ रुपये के बिलों के सापेक्ष 1,744.19 करोड़ रुपये आए, जो कि 90.44 प्रतिशत है। कुमाऊं जोन में 1,980.10 करोड़ रुपये के बिल के मुकाबले 1,704.09 करोड़ रुपये ही जमा हुए जो कि सबसे कम 86.06 प्रतिशत है।
ऋषिकेश और गैरसैंण ने किया कमाल, श्रीनगर-पौड़ी में भारी लापरवाही
संभागों के स्तर पर कई दिलचस्प और चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। विद्युत वितरण खंड ऋषिकेश ने ऐतिहासिक 115.12 प्रतिशत राजस्व जुटाया। गैरसैंण संभाग की संग्रहण दक्षता भी 100.78 प्रतिशत रही। सबसे खराब प्रदर्शन पिथौरागढ़ (75.27 प्रतिशत), पौड़ी (76.79 प्रतिशत) और श्रीनगर (77.61 प्रतिशत) संभागों का रहा। राजस्व वसूली के अलावा बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान को दर्शाने वाली बिलिंग दक्षता में भी भारी अंतर देखा गया है। राज्य की औसत बिलिंग दक्षता 86.21 प्रतिशत है। मतलब करीब 14 प्रतिशत बिजली का या तो बिल नहीं बन पा रहा है या वह चोरी हो रही है। विद्युत वितरण खंड सिडकुल की बिलिंग दक्षता 98.51, कोटद्वार संभाग की 97.14 प्रतिशत रही। रुड़की शहरी संभाग की बिलिंग दक्षता मात्र 64.13 प्रतिशत रही। धारचूला की 69.56 प्रतिशत और लक्सर की 70.27 प्रतिशत रही।







