उत्तराखंड के चार शहरों में पहले चरण में कुत्तों के लिए आश्रय स्थल (डॉग शेल्टर) बनाए जाएंगे। इसके लिए शहरी विकास निदेशालय ने चारों नगर निगमों से प्रस्ताव मांगा है। इनमें करीब 2000 कुत्तों को रखने, इलाज की व्यवस्था होगी।सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद शहरी विकास निदेशालय लगातार कोशिशों में जुटा हुआ है। तय किया गया है कि हर नगर निकाय में निराश्रित कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। इस कड़ी में पहले चरण में नगर निगम देहरादून, हरिद्वार, काशीपुर और हल्द्वानी का चयन किया गया है।चारों नगर निगमों से इन आश्रय स्थलों का प्रस्ताव मांगा गया है। यहां करीब 2000 कुत्तों को रखने की सुविधा होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत जब तक स्थायी शेल्टर नहीं बन जाते, तब तक अस्थायी शेल्टर भी बनाए जाएंगे। धीरे-धीरे सभी शहरी निकायों में ये आश्रय स्थल बनाए जाएंगे।
अस्पतालों में नोडल अधिकारी बनाए गए
सभी सरकारी अस्पतालों में एक-एक नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी है कि ये निराश्रित कुत्तों को लेकर अपनी सूचना नगर निकाय को देंगे, जिसके आधार पर उन्हें समय से हटावाया जा सकेगा। जो कुत्ते ज्यादा खतरनाक होंगे, उन्हें पकड़ सीधे आश्रय स्थल भेजा जाएगा। इसके अलावा जो कुत्ते दुर्घटना या अन्य कारण से घायल होंगे, उन्हें भी आश्रय स्थल भेजा जाएगा।
सार्वजनिक स्थानों से हटेंगे निराश्रित पशु
पहले चरण में सभी सार्वजनिक स्थानों निराश्रित गोवंश और कुत्तों को हटाया जाएगा। शहरी विकास विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जिन सार्वजनिक स्थानों में बाउंड्री नहीं है, वहां तत्काल बनवाई जाए। ताकि निराश्रित पशु भीतर प्रवेश न कर सकें। दूसरी ओर, कई नगर निकायों ने वार्डों में डॉग फीडिंग प्वाइंट भी बना दिए हैं।







