प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर नियामक आयोग पहुंचे उपभोक्ताओं ने कहा कि यूपी में पांच साल से बिजली के दामों में बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन उत्तराखंड में हर साल क्यों की जा रही है। उद्योग प्रतिनिधियों ने जहां इसे उद्योगों के लिए घातक करार दिया तो आम उपभोक्ता भी आयोग के समक्ष नाराज नजर आए।शुक्रवार को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सुनवाई कक्ष में आयोग अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी और सदस्य विधि अनुराग शर्मा ने प्रस्तावित नई विद्युत दरों पर जनसुनवाई की।जनसुनवाई में पहुंचे यशवीर आर्य, उम्मेद सिंह, रमेश जोशी, प्रदीप सती समेत कई प्रतिनिधियों ने कहा कि यूपी में कई वर्षों से बिजली के दाम नहीं बढ़ लेकिन यहां बार-बार बढ़ाए जा रहे हैं।जनसुनवाई में पूर्व अधिकारी एसएम बिजल्वाण ने कहा कि लाइन हानियों को कम करने, विभागों से वसूली करने के बजाए आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। यूकेडी की प्रतिनिधि मीनाक्षी घिल्डियाल ने स्मार्ट मीटर से स्वत: कनेक्शन लोड बढ़ाने को लूट करार देते हुए रोकने की मांग की। हालांकि मामले में यूपीसीएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यूपी में राज्य सरकार सब्सिडी देती है, जिस कारण दरें नहीं बढ़ती लेकिन उत्तराखंड में ऐसा प्रावधान नहीं है।
76 प्रतिशत उद्योग आ गए हैं खतरे में
जनसुनवाई में उद्योग प्रतिनिधि राजीव अग्रवाल ने कहा कि यूपीसीएल और पिटकुल हमें चूना लगा रहे हैं। तीनों ऊर्जा निगम पूंजीकरण का खेल खेल रहे हैं, जो उद्योगों पर भारी साबित हो रहा है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि एलटी टैरिफ में हम यूपी, हिमाचल से आगे हैं। सरकारी उपक्रमों से बिल वसूली न करके यूपीसीएल उद्योगों पर बोझ बढ़ा रहा है। मांग की कि बढ़ोतरी न की जाए, इससे पलायन बढ़ रहा है। उद्योग प्रतिनिधि पवन अग्रवाल ने कहा कि हमें अपना टैरिफ यूपी से डेढ़ से दो रुपये सस्त करना होगा, तभी उद्योग यहां आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ही 30 पैसे सेस, 10 पैसा रॉयल्टी और 60 पैसा वाटर टैक्स के नाम पर उपभोक्ताओं से ले रही है। इसी से टैरिफ का समायोजन किया जाए। उद्योग प्रतिनिधि डॉ. हरेंद्र गर्ग ने कहा कि राज्य में 76 प्रतिशत उद्योग ऐसे हैं जो कि थर्ड पार्टी जनरेटर यानी दूसरों के लिए काम करते हैं। 20 साल पहले उन्हें जो मेहनताना मिलता था, आज भी वही मिलता है जबकि बिजली के दामों में भारी उछाल आ चुका है। मांग की कि बढ़ोतरी न की जाए वरना उद्योगों से जुड़े आठ लाख से अधिक कर्मचारी बेरोजगारी के खतरे में आ जाएंगे।
स्मार्ट मीटर में गड़बड़ लगे तो तुरंत बताएं, चेक मीटर लगाएंगे
स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ता खफा नजर आए। कई उपभोक्ताओं का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनका बिल लगभग दोगुना हो गया। हालांकि यूपीसीएल प्रतिनिधियों का कहना था कि अगर किसी के स्मार्ट मीटर में कोई गड़बड़ी लग रही है तो वह यूपीसीएल को बताए, चेक मीटर लगाया जाएगा। यूपीसीएल प्रबंधन ने स्मार्ट मीटर को लेकर सुझाव भी मांगे। पहली बार आयोग में इतनी भीड़ उमड़ी।







