रुद्रपुर। राज्य कर विभाग ने बोगस और फर्जी बिलों के जरिये कारोबार कर टैक्स लाभ लेने वाले कारोबारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच में अब तक 15 फर्मों को चिह्नित किया गया है जो संदिग्ध तरीके से खरीद-बिक्री दर्शा कर लाभ लेने के दायरे में आई हैं।जांच में सामने आया है कि कुछ फर्में फर्जी या गैर मौजूद आपूर्तिकर्ताओं से खरीद दिखा कर अपनी कर देयता कम कर रही थीं। इस तरह की बोगस बिलिंग के जरिये इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत तरीके से लाभ लेने के संकेत मिले हैं।अधिकारियों का कहना है कि फर्जी बिलिंग के इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए दस्तावेज की गहन जांच की जा रही है और संदिग्ध लेन-देन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। इस कार्रवाई से टैक्स चोरी पर प्रभावी रोक लगेगी और वास्तविक कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। संबंधित फर्मों के रिकॉर्ड और लेन-देन की पड़ताल कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
करवाई से मची खलबली
शुक्रवार को रुद्रपुर-किच्छा बाईपास स्थित एक सिविल संविदाकार और फुलसुंगा स्थित मानव श्रम फर्म आपूर्तिकर्ता पर विशेष अनुसंधान इकाई के गठित जांच दलों ने सर्वे किया। जांच से पहले फर्मों की व्यापारिक गतिविधियों की निगरानी की गई थी। प्रारंभिक जांच में 2022-23 से जनवरी 2026 तक दिल्ली और उत्तराखंड की फर्जी, गैर मौजूद विवादित आपूर्ति फर्मों से खरीद दर्शा कर करोड़ों के कपटपूर्ण आईटीसी दावे किए जाने के संकेत मिले। सर्वे के दौरान व्यापार स्थल के रिकॉर्ड कब्जे में लेकर फर्म संचालकों से पूछताछ की गई। संचालकों की ओर से लगभग 50 लाख रुपये की धनराशि डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराई गई है। फिलहाल सर्वे की कार्यवाही जारी है।बोगस और फर्जी बिलों के जरिये कारोबार करने वाली फर्मों पर विशेष अनुसंधान इकाई की ओर से लगातार निगरानी और जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध लेन-देन और कपटपूर्ण आईटीसी दावों के संकेत मिले हैं। अब तक करीब 15 फर्मों को चिह्नित किया गया है। पूरी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। – विनय प्रकाश ओझा, उपयुक्त, जीएसटी







